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तमिलनाडु के एक मेडिकल छात्र द्वारा हिंदी न जान पाना उसके लिए मौत का कारण बन गया. चंडीगढ़ के जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर कृष्ण प्रसाद रामासय ने हिंदी समझने में होने वाली दिक्कत के चलते फांसी लगाकर अपनी जान दे दी.

रामासय पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजूकेशन एंड रिसर्च((PGIMER) से पीजी कोर्स की पढ़ाई कर रहा था. रामासय ने अपनी मां को रविवार शाम को फोन कर वापस घर आने की बात कही थी. जिसका कारण उसने हिंदी न आने की वजह से हो रही परेशानियों को बताया था.

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उन्होंने बताया, मेरा बेटा काफी पहले घर वापस आने को कह रहा था. रविवार को फोन करके भी उसने यही कहा था लेकिन हम हमेशा उसे यही कहते रहे कि मेरिट में सीट मिलने पर उसे ऐसे नहीं लौटना चाहिए. मैने उसे कुछ समय और इंतजार करने को कहा, ताकि चीजें अपने अनुकूल हो जाएं.

24 साल के डॉ. रामासय ने दो महीने पहले ही पीजीआई में बतौर जूनियर डॉक्टर जॉइन किया था. वह रेडियोलजी विभाग में थे. रामासय मेडिकल में टॉपर थे और उन्हें मेडिसिन में दाखिला मिला था. मेडिकल कॉलेज प्रशासन से फोन से छात्र की आत्महत्या की जानकारी मिलते ही मां-बाप तमिलनाडु से चंडीगढ़ रवाना हो गए.

ध्यान रहे चंडीगढ़ पीजीआई में 56 फीसदी डॉक्टर दक्षिणी राज्यों से हैं. ऐसे में पंजाब, हरियाणा, यूपी, जम्मू-कश्मीर से आने वाले मरीजों की भाषा में बात करना डॉक्टरों के लिए हमेशा बड़ी समस्या रहती है.

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