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झारखंड के बीजेपी सरकार के शासन में भूख से लोगों के मरने का जो सिलसिला शुरू हुआ है. वो रुकने का नाम नहीं ले रहा है. एक बार फिर से ऐसा ही मामला सामने आया है. जिसमे एक विधवा की अन्न का दाना न मिलने से मौत हो गई.

प्राप्त जानकारी के अनुसार, गिरिडीह जिले के सेवाटांड़ गांव में बुधनी सोरेन नामक आदिवासी महिला की भूख के चलते मौत हुई. गांववालों के मुताबिक महिला के घर राशन नहीं था, पेट भरने के लिए वह प्राथमिक विद्यालय में पढ़ने वाले अपने बच्चे के स्कूल जाती थी. जहां मिड-डे-मील से किसी तरह पेट भरती थी.

हालांकि प्रशासन का इस मामले में भी महिला की मौत का कारण भूख को मानना मंजूर नहीं है. बल्कि बीजेपी शासन की साख बचाने के लिए प्रशासन ने महिला की मौत के बाद उसके घर में अनाज रख वीडियो बनवाया और दावा किया कि महिला की मौत भूख की वजह से नहीं हुई है.

इस मामले में माले विधायक राजकुमार यादव ने सवाल उठाते हुए कहा कि ‘‘मैं संतोषी कुमारी और बैजनाथ महतो के मामले की तरह इसको भी विधानसभा में उठाऊंगा. हमेशा की तरह प्रशासन जान-बूझकर पर्दा डाल रहा है. आखिर प्रशासन भुखमरी से मौत का मामला सामने आने पर शव का पोस्टमार्टम क्यों नहीं कराता ?”

वहीँ गांव के मुखिया बालेश्वर राय ने कहा- ‘‘ पता चला है कि महिला की मौत भूख से हुई। अगर मुझे समय से जानकारी मिल जाती तो मैं कुछ कर सकता था.” मीडिया रिपोर्टो के मुताबिक बुधनी को तीन दिन से भोजन नहीं मिला था. वह जंगल से पत्ते चुनकर दोना बनाती थी। कुछ दिनों पहले ठंड से बीमार हुई तो घर में ही पड़ी रही.

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