झारखंड इन दिनों मोब लिंचिंग का आखाडा बना हुआ है। जहां बात-बात पर लोगों की जान ली जा रही है। चारो ओर जाति-धर्म को लेकर लोगों के बीच भेदभाव, मारपीट की घटनाएं सामने आ रही है। इसी बीच एक राहत देने वाली खबर आई है।

इस्लामपुर ब्लॉक के माटीकुंडा गांव में मुंहबोले मुस्लिम बेटे ने अपनी मृत हिंदू सम्प्रदाय की मां का दाह संस्कार से लेकर श्राद्धकर्म तक किया. माटीगुंडा गांव में का मोहम्मद सलीम ममता बाड़ुई को अपनी माँ सम्मान मानता था।
आठ साल की उम्र मे दोनों के बीच माँ-बेटे का बना ये रिश्ता 16 साल तक चला।अचानक ममता बाड़ुई के बीमार पड़ने से दो जून को उसकी मौत हो गयी। सलीम ने पूरे हिन्दू रीति-रिवाजों के अनुसार ममता का दाह संस्कार किया। सलीम का कहना है कि ममता मां ने ही उसे सभी धर्मों के प्रति समान श्रद्धा रखना सिखाया है। इतना ही नहीं सलीम को नमाज पढ़ने के लिए प्रेरित करने, मस्जिद जाने व ईद में नमाज पढ़ने के लिए भी उसकी ममता मां ने प्रेरित किया।
सलीम की मां सबीना खातून ने बताया कि वह ममता के पास ही बड़ा हुआ है। वह अपने मन की शांति के लिए यह सब कर रहा है। इलाके के तमाम लोगों के लिए सलीम चर्चा का विषय बना हुआ है। वह इलाके के साम्प्रदायिक सद्भावना का मिशाल बन चुका है।

वहीं दूसरी और कर्नाटक के मंगलुरु मे भी हिंदू-मुस्लिम भाईचारे की मिसाल देखने को मिली। यहां मुस्लिम युवाओं का एक ग्रुप हिंदू युवक की मदद को आगे आया। हिंदू युवक की 52 वर्षीय बहन की हार्ट अटैक से मौत हो गई थी। उनके अंतिम संस्कार के लिए मुस्लिम युवकों ने हाथ बढ़ाया।
यहां विद्यापुरा के पुट्टूर तालुक की रहने वाली भवानी की मौत हो गई। भवानी शादीशुदा नहीं थीं। उनके भाई कृष्णा ने रिश्तेदारों और स्थानीय लोगों से बहन के अंतिम संस्कार के लिए मदद मांगी। शनिवार की दोपहर तक कृष्णा की मदद को कोई भी नहीं आया। उन्होंने रिश्तेदारों से फिर संपर्क किया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।

कृष्णा उदास हो गए उनकी आंखों से आंसू बहने लगे। वह सोचने लगे कि अब वह अपनी बहन का अंतिम संस्कार कैसे करेंगे, तभी शौकत, हमजा, नजीर, रियाज और फार्रुख आए और उन्होंने कृष्णा को आश्वासन दिया। युवकों ने भवानी के अंतिम संस्कार के लिए चंदा जुटाना शुरू किया। आंगनबाड़ी शिक्षिका राजेश्वरी, साफिया और जबैदा भी युवकों की अपील पर मदद करने आगे आईं।

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तीनों ने भवानी के शव को नहलाकर अंतिम संस्कार के लिए तैयार किया। उनके शव को अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया। युवकों ने जो चंदा एकत्र किया उससे भवानी का क्रियाकर्म हुआ।

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