Friday, June 18, 2021

 

 

 

रासुका के तहत बंद जावेद सिद्दीकी रिहा, हाईकोर्ट ने कहा – प्रशासन की तरफ से हुई लापरवाही

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नई दिल्ली: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने जौनपुर जिले में जून महीने में दंगा-फसाद करने और आगजनी के आरोप में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (National Security Act) के तहत हिरासत में लिए गए आरोपी सपा नेता जावेद सिद्दीकी को करीब सात माह बाद रिहा कर दिया।

कोर्ट ने कहा कि इस मामले में प्रशासन की तरफ से ‘दिखाई गई लापरवाही’ के चलते शख्स को ‘न्यायपूर्ण सुनवाई’ नहीं मिल पाई है। आदेश में कहा गया है कि अधिकारियों की अकर्मण्यता के चलते याचिकाकर्ता को मिले संवैधानिक सुरक्षा का हनन हुआ है।

जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव और जस्टिस प्रीतिंकर दिवाकर की खंडपीठ ने जावेद सिद्दीकी की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर हिरासत आदेश को रद्द करते हुए कहा कि एनएसए जैसे कानून को प्रशासन द्वारा ‘अत्यधिक सावधानी’ के साथ प्रयोग किया जाना चाहिए।

सिद्दीकी के जमानती आदेश में कोर्ट ने कहा, ‘यह कानून अधिकारियों को किसी को गिरफ्तार करने के असमान्य शक्ति देता है, ऐसे में अधिकारियों को इस कानून का और इस शक्ति का बहुत ज्यादा ध्यान के साथ इस्तेमाल करना चाहिए।’

नौ जून, 2020 को जौनपुर के भदेठी गांव में बच्चों के बीच झगड़े ने हिंसक रूप ले लिया जिसके बाद गांव में सांप्रदायिक तनाव पैदा हो गया और दलितों की एक दर्जन से अधिक झुग्गियां जला दी गईं और दलितों के अन्य 14 मकानों को भारी नुकसान पहुंचा। जावेद और अन्य लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई। जावेद को 10 जुलाई को गिरफ्तार किया गया और जौनपुर के जिलाधिकारी द्वारा उसके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) की धारा 3(2) के तहत हिरासत का आदेश पारित किया गया।

10 दिन बाद सिद्दीकी को एक स्पेशल कोर्ट के जज ने जमानत दे दी लेकिन उत्तर प्रदेश के गैंगस्टर एक्ट के तहत उन्हें जेल में ही रहना पड़ा।

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