जम्मू हाईकोर्ट ने जेल में बंद रोहिंग्या मुस्लिमों के मामले में जेल प्रशासन को उनके परिवार से मिलने का निर्देश जारी कर कहा कि परिजनों को मिलने से रोका नहीं जा सकता.

जस्टिस जनक राज कोतवाल ने  जेल अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे इन विचाराधीन कैदियों को अपने परिजनों से मिलने दें. दरअसल इस सबंध में एडवोकेट एसएस अहमद ने याचिका दायर की थी.

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उन्होंने अपनी याचिका में जेल में बंद रोहिंग्याओं से उनके परिजनों को मिलने से जेल अधिकारियों का आदेश को चुनोती दी. उन्होंने कहा, रोहिंग्या यूनाइटेड नेशन हाई कमिश्नर के दिल्ली कार्यालय में रजिस्टर्ड हैं और उन्हें सुरक्षा और आजादी का अधिकार है.

अदालत ने यह निर्देश तीन अलग-अलग बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकाओं की सुनवाई के बाद दिया. साथ ही जम्मू-कश्मीर गृह विभाग के प्रमुख सचिव, राज्य के पुलिस महानिदेशक, सीआइडी के एडिशनल, डायरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस, डायरेक्टर जनरल प्रिजन, डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट जम्मू, एसएसपी जम्मू और जेल सुपरिंटेंडेंट को निर्देश दिए कि वे 11 सितंबर 2017 को इस पर अपना पक्ष रखें.

यह याचिका एडवोकेट शेख शकील अहमद, एडवोकेट अमजद खान और तोकीर नजीर ने नूर-उल-अमीन, शब्बीर अहमद और मुहम्मद सलीम निवासी कारगिल कॉलोनी, नरवाल बाला ने दायर की थी. यह सभी डिस्ट्रिक्ट जेल अंबफला में नजरबंद हैं.

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