मध्य प्रदेश एटीएस द्वारा बुधवार को राज्य में हुई पाकिस्तानी जासूसों गिरफ्तारी के बाद मप्र की इंटेलिजेंस एजेंसियों पर भी सवाल उठने लगे हैं. राज्य में पिछले तीन साल से ISI का नेटवर्क बिना किसी रोकटोक के चल रहा था और मप्र की इंटेलिजेंस एजेंसियों को खबर भी नहीं थी. कहा जा रहा हैं कि पिछले साल यदि जम्मू के थाना आरएसपुरा में सतविंदर एवं दादू नहीं पकड़े जाते तो शायद प्रदेश में फैल चुका आईएसआई एजेंट का ये नेटवर्क मध्य प्रदेश एटीएस कभी पकड़ ही नहीं पाती.

दूसरी तरफ इस नेटवर्क में बीजेपी नेताओं से जुड़े पार्टी के कार्यकर्ताओं और संघ परिवार से जुड़े संगठन बजरंग दल के कार्यकर्ताओं के नाम आने के बाद शिवराज सरकार पर भी सवाल उठाना लाजमी हो गया हैं. ऐसे में सवाल उठता हैं कि कही ये पूरा नेटवर्क राज्य के किसी बड़े नेता की सरपरस्ती में तो नहीं चलाया जा रहा था. इसी के साथ इस नेटवर्क के तार पठानकोट और उडी हमले से भी जुड़ रहे हैं.

इधर इसे पूरे गिरोह के मुख्य सरगना बताए जा रहे बजरंग दल कार्यकर्त्ता बलराम के कनेक्शन उत्तर प्रदेश के बांदा जिले से भी है. हां उसने 18 एकड़ की करोड़ो की जमीन खरीद रखी हैं. सके अलावा अब तक हुई पूछताछ में बलराम ने उसके साथ शामिल कुछ लोगों का नाम बताया है जो कि रीवा में है. काउंटर इंटेलिजेंस की टीम रीवा भी रवाना हुई है. करीब 100 से ज्यादा खातों के जरिए आईएसआई एजेंट व हैंडलर्स के कहने पर जानकारियां भेजने वालों को पैसे भिजवाने व लॉटरी फ्रॉड के पैसों को जमा करने के लिए उनसे अपने परिचितों के नाम पर भी खाते खुलवाए थे.

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उधर पाकिस्तानी एजेंटों के मददगार युवकों को कोर्ट ने 14 फरवरी तक एटीएस की रिमांड पर सौंपा है. एटीएस ने शुक्रवार को एसीजेएम सतीशचंद्र मालवीय की कोर्ट में सेठी नगर, रामपुर, जबलपुर निवासी मनोज भारती, पटेल मोहल्ला, सत्यानंद कालोनी , जबलपुर निवासी संदीप गुप्ता, न्यू मिनाल रेसीडेसी भोपाल निवासी ध्रुव सक्सेना, साकेत नगर भोपाल निवासी मोहित अग्रवाल, ई-4, अरेरा कालोनी ,भोपाल निवासी मनीष गॉधी को पेश किया था. एटीएस ने कोर्ट में रिमांड अर्जी पेश करते हुए कहा कि उन्हें आरोपी संदीप गुप्ता और मनोज भारती ने पूछताछ में बताया है कि वे जबलपुर में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सिम प्राप्त करते थे.

इस तरह उन्होंने सैकड़ों सिम प्राप्त कर ली हैं. इन सिमों को वे अपने नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों को प्रदान कर देते थे. नेटवर्क से जुड़े हुए लोग इन सिमों को सिम बॉक्स में लगाकर देश की सुरक्षा से जुड़ी जानकारियॉं पाकिस्तानी एजेंटों तक पहुॅंचा देते थे. इस काम में भोपाल निवासी आरोपी ध्रुव सक्सेना, मोहित अग्रवाल और मनीष गॉंधी सिम बॉक्स के माध्यम से कॉल सेंटर चलाकर कर रहे थे.

एटीएस ने कहा कि उन्हें आरोपियों से पूछताछ कर फर्जी दस्तावेज, सिम कार्ड और सिम बॉक्स में उपयोग किए गए अन्य उपकरण बरामद करने हैं. वे इस साजिश में शामिल अन्य लोगों के नामों का खुलासा भी करना चाहते हैं. कोर्ट ने एटीएस के तर्कों से सहमत होते हुए रिमांड अर्जी स्वीकार कर ली है. गौरतलब है कि एटीएस ने गुरूवार को इसी मामले से जुड़े आरोपी बलराम सिंह, कुश पंडित, जितेन्द्र ठाकुर, रीतेश खुल्लर, जितेन्द्र सिंह यादव और त्रिलोक सिंह भदौरिया पुलिस रिमांड पर लिया है.

 

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