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नई दिल्ली/ लखीमपुर – मशहूर शायर मुनव्वर राना का एक बहुत मशहूर शेर है कि गुलाब ऐसे ही थोड़े गुलाब होता है, ये बात कांटों पे चलने के बाद आती है मुनव्वर राना का ये शेर मुजफ्फरनगर के चरथावल के रहने वाले मोहम्मद इरशाद त्यागी पर बिल्कुल सटीक बैठता है। जिन्होंने लंबे संघर्ष के बाद सफलता पाई है। मुजफ्फरनगर के कस्बा चरथावल के रहने वाले वली मोहम्मद के छः बच्चों में तीन लड़कियां और तीन लड़के हैं।

इरशाद त्यागी अपने भाईयों और बहनों में सबसे छोटे हैं, फिलहाल वे लखीमपुर में तैनात हैं, जहां एसएसपी और जिलाधिकारी ने उन्हें स्टार लगाकर इंस्पेक्टर बनने की मुबारकबाद दी है। उन्होंने अपने फर्ज को निभाने में कभी कोताही नहीं बरती 1987 से लेकर अब तक वे मेहनत और ईमानदारी के साथ अपने फर्ज को अंजाम देते रहे। इरशाद अब इंस्पेक्टर हैं, और यहां तक पहुंचने के लिये उन्होंने बतेहाशा मेहनत की है। शायरी का शौक रखने वाले इरशाद त्यागी थ्री स्टार होकर इंस्पेक्टर बनने के बाद यह जरूर गुनगुना रहे होंगे कि –

इतनी शिद्दत से मैने तुम्हें पाने की कोशिश की है

कि  हर जर्रे ने मुझे तुमसे मिलाने की कोशिश की है

बचपन से था दौड़ने का शौक

इरशाद त्यागी को बचपन से ही दौड़ लगाने का शौक था, वे लगातार कई सालों तक मैराथन के चैंपियन रहे, और एथलीट कोटे से 1987 में यूपी पुलिस में भर्ती हो गये। इसके बाद वे हेड कांस्टेबल बने और उसके बाद उन्होंने एसआई की परीक्षा उत्तीर्ण की जिसके बाद वे दारोगा बन गये। हाल ही में यूपी पुलिस द्वारा 2192 थ्री स्टार इंस्पेक्टर बनाये गये हैं, जिसमें इरशाद त्यागी को 1795 वीं रैंक हासिल हुई है। वे फिलहाल लखीमपुर में तैनात हैं।

लौटा दिया कैश से भरा बैग

बात 23 मार्च 2013 की है उस वक्त इरशाद त्यागी लखनऊ की एनईआर चौकी प्रभारी हुआ करते थे, तब उन्हें लखनऊ के चारबाग रेलवे स्टेशन पर एक ज्वैलरी और कैश से भरा हुआ बैग मिला यह बैग लखनऊ के गौमतीनगर नगर के विनीत खंड निवासी रमेश चंद की पत्नि भाग्य लक्ष्मी का था, जिसे वह हड़बड़ी में स्टेशन पर ही भूल आईं थीं। जब इरशाद त्यागी की नजर उस लावारिस पड़े बैग पर पड़ी तो उन्होंने उस बैग को अपने कब्जे में ले लिया। उन्होंने बैग को खोलकर देखा तो उसके अंदर भारी मात्रा में कैश और ज्वैलरी थी लेकिन यह देखकर भी उनका ईमान नहीं डोला।

उन्होंने बैग को खंगाला तो उसमें कुछ कागजात देखे उन्हीं में बैग के मालिक रमेशचंद के परिवार का मोबाईल नंबर भी था उन्होंने उन्हें फोन किया और वह बैग लिखा पढ़ी करने के बाद उन्हें वापस लौटा दिया। इरशाद त्यागी की इस ईमानदारी से खुश होकर उन्हें यूपी पुलिस द्वारा पुरुस्कृत भी किया गया था।

उस दिन दिखे थे खाकी के दो रंग

यह भी महज एक इत्तेफाक ही था कि 23 मार्च 2013 के दिन जहां इरशाद त्यागी ईमानदारी की कसौटी पर खरे उतरे वहीं, यूपी की राजधानी लखनऊ में ही एक दारोगा को दस हजार रूपये की रिश्वत लेने के आरोप में सस्पेंड किया गया था। जिस रोज इरशाद त्यागी अपने जिस्म पर पहनी हुई खाकी की ईमानदारी को दिखा रहे थे उसी रोज लखनऊ के चिन्हट में एक दारोगा रामबरन पांडेय खाकी का रौब दिखाकर डॉक्टरों से रिश्वत मांग रहा था, डॉक्टरों ने इसकी शिकायत एसएसपी से कर दी थी जिसके बाद रामबरन पांडेय को सस्पेंड कर दिया गया था।

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