ईरान की और से शहंशाह-ए-हिन्द हजरत ख्वाजा गरीब नवाज (रह.) के दरबार में एक नायाब तोहफा पेश किया गया हैं. ईरान के कारीगरों ने ख्वाजा गरीब नवाज (रह.) की लिखी मशहूर जमाना रूबाई ‘शाह अस्त हुसैन बादशाह अस्त हुसैन’ को लगभग डेढ़ मीटर ऊचांई और एक मीटर चैड़ाई वाली तस्वीर पर उतारा हैं. इसे छोटी टाईलों से बनाकर एक तस्वीर का रूप दिया गया हैं.

ये तस्वीर हिंदल वली सरकार ले 805वें उर्स के मौके पर पेश की जानी हैं, जो 30 मार्च से शुरू होने वाला हैं. अल कदीर इन्टरनेशनल फाउंडेशन ईरान की ओर से पेश की गई तस्वीर में फ़ारसी भाषा में लिखी इस रुबाई को पुरानी ईरानी शैली में संवारा गया हैं. ये रुबाई हजरत ख्वाजा गरीब नवाज ने हजरत इमाम हुसैन (रजि.) की शान में लिखी थी.

दरगाह कमेटी द्वारा बुलन्द दरवाजे के बाईं तरफ वाली दीवार पर इसे लगाए जाने का प्रस्ताव है. फिलहाल यह तस्वीर ईरान दूतावास में पहुंच चुकी है और 26 मार्च को इसका उद्घाटन केंद्रीय अल्पसंख्यक मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी और ईरान के दूतावास से करवाने की उम्मीद है.

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रुबाई:

शाह अस्त हुसैन, बादशाह अस्त हुसैन!
दीन अस्त हुसैन, दीन पनाह अस्त हुसैन!
सरदाद,नदाद दस्त दर दस्ते यज़ीद!
हक्का कि बिना ला इलाहा अस्त हुसैन!

तर्जुमा:

शाह भी हुसैन, बादशाह भी हुसैन!
दीन भी हुसैन हैं, दीन को पनाह देने वाला भी हुसैन हैं!
सर दे दिया, मगर नही दिया अपना हाथ यज़ीद के हाथ मे,
हकीकत ये हे कि ला इलाहा इल्लाह की बुनयाद ही हैं हुसैन!

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