dabh

अंधविश्वास विरोधी कार्यकर्ता नरेंद्र दाभोलकर और वामपंथी नेता गोविंद पानसरे हत्या मामलों में  बॉम्बे हाई कोर्ट ने गुरुवार को सीबीआई को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने जांच को असंतोषजनक करार देते हुए कहा कि जांच ईमानदारी से नहीं की गई।

कोर्ट ने सीबीआई के वरिष्ठ अधिकारियों और महाराष्ट्र सरकार को नोटिस जारी करके अगली सुनवाई में उपस्थित होने को कहा है। इसके लिए कोर्ट ने सीबीआई और महाराष्ट्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों को भी समन किया।

कोर्ट ने सख्त टिप्पणी भी की कि ऐसे वरिष्ठ अधिकारियों को अदालत में बुलाने से कोई ख़ुशी नहीं मिलती पर कोर्ट द्वारा पिछली सुनवाई के दौरान उठाए गए मुद्दों को गंभीरता से नहीं लिया गया है।

मुस्लिम परिवार में शादीे करने के इच्छुक है तो अभी फोटो देखकर अपना जीवन साथी चुने (फ्री)- क्लिक करें 

न्यायमूर्ति एस.सी. धर्माधिकारी व न्यायमूर्ति भारती डागरे की खंडपीठ ने कहा कि सीबीआई और सीआईडी का कहना है कि वे कर्नाटक पुलिस के साथ कॉर्डिनेट कर रहे हैं जो गौरी लंकेश और लेखक एमएम कलबुर्गी केस की जांच कर रही है। उनका दावा है कि उनकी नजर कुछ सस्थाओं और संगठनों पर है। फिर कर्नाटक पुलिस ने महाराष्ट्र से कैसे गिरफ्तारी की ?

इसी महीने कर्नाटक के एसआईटी ने महाराष्ट्र के परशुराम वाघमारे को गौरी लंकेश हत्याकांड के आरोप में गिरफ्तार किया था। कोर्ट ने कहा कि क्या यहां पर कॉर्डिनेशन की कमी है या अधिकारियों ने अपनी जांच सिर्फ मोबाइल रिकॉर्ड तक ही सीमित रखी है।

वही गुरुवार को नरेंद्र दाभोलकर की बेटी मुक्ता दाभोलकर ने कोर्ट में हलफ़नामा दायर कर कहा, ‘जिन दो हथियारों से गोविंद पानसरे की हत्या की गई थी, उनमें से एक हथियार मेरे पिता की हत्या के लिए भी प्रयोग किया गया था।

मालूम हो कि दाभोलकर की 20 अगस्त, 2013 को पुणे में सुबह की सैर के दौरान गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, जबकि पानसरे को 16 फरवरी, 2015 को कोल्हापुर में गोली मारी गई थी और जिसके चार दिन बाद 20 फरवरी को उनकी मौत हो गई थी।

वहीं प्रोफेसर कलबुर्गी की हत्या 30 अगस्त 2015 को धारवाड़ में उनके घर पर की गई थी, जबकि वरिष्ठ पत्रकार गौरी लंकेश को 5 सितंबर 2017 की शाम बेंगलुरु स्थित उनके घर के सामने गोली मार दी गई थी।