Thursday, December 2, 2021

तीन तलाक पर शरीयत में दखलंदाजी, सुप्रीम कोर्ट का फैसला मंजूर नहीं: दरगाह आला हजरत

- Advertisement -

एक साथ तीन तलाक देने पर सुप्रीम कोर्ट के आए फैसले पर दरगाह आला हजरत ने अपनी नाख़ुशी जाहिर की है. साथ ही फैसले को शरीयत में खुली दखलंदाजी बताते हुए कहा कि इस फैसले को कबूल नहीं किया जा सकता.

हम तमाम मामलों में देश के कानून को मानते हैं और मानते रहेंगे, लेकिन शरीयत के खिलाफ कोई फैसला हमें मंजूर नहीं होगा. तीन तलाक को एक बार में तीन ही माना जाएगा.अब चाहे सरकार कानून बनाकर इस पर रोक ही क्यों ना लगा दे. उन्होंने कहा कि तलाक मजबही मामला है. उसमें अदालत दखल नहीं दे सकती.

– दरगाह आला हजरत के सज्जादा नशीन मौलाना तस्लीम रजा खां –

मुसलमान शरीयत का कानून मानते हैं. कुरान और हदीस के मुताबिक जो भी फैसला होगा. उसी को माना जाएगा. बाकी कोई भी एडी चोटी का जोर लगा ले उसका फैसला नहीं माना जाएगा.

– मुफ़्ती खुर्शीद आलम, शहर इमाम: बरेली –

मुसलमान शरियत को सामने रखकर जिंदगी गुजारते हैं. तीन तलाक भी शरीयत का हिस्सा है, इसे बदला नहीं जा सकता. शरीयत तीन तलाक को जायज करार देती है. मुसलमान शरीयत के फैसले पर अडिग रहेंगे. अब चाहे उसे कानूनन में हराम या नाजायज करार दे दिया जाए.

– मुफ्ती सैयद मोहम्मद कफील हाश्मी मंजरे इस्लाम: दरगाह आला हजरत –

मजहबी मामलत में दुनियावी दखलदांजी अच्छी नहीं रहती. दुनियावी कानून में सुधार होते रहते हैं पर शरीयत में तब्दीली मुमकिन नहीं. इसे छेडऩे से मामला और पेचीदा हो जाता है. फैसले की कॉपी आने पर ही पूरा मामला समझा जाएगा.

– शब्बू मियां नियाजी प्रबंधक खानकाह-ए-नियाजिया –

अव्वल तो मजहब के मामलों में किसी भी संस्था को दखल नहीं देना चाहिए, क्योंकि संवैधानिक तौर से अल्पसंख्यकों के अपने अकीदे की आजादी है. फिर भी कोर्ट ने जो फैसला दिया है वो संसद के लिए हिदायत है. संसद के नुमाइंदे तीन तलाक पर जो भी कानून बनाएं वो शरीयत की रोशनी में बने. मुस्लिमों के उसूल और कानून का ख्याल रखा जाए. छह माह की रोक किस वजह से लगी है. फैसले की कॉपी मिलने के बाद इसका निष्कर्ष निकाला जाएगा.

– मौलाना शहाबुद्दीन रजवी महासचिव जमात रजा ए मुस्तफा –

- Advertisement -

[wptelegram-join-channel]

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Hot Topics

Related Articles