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श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबलों के पैलेट गन के हमले में अपनी आखों को खोने वाली 14 साल की इंशा मुश्ताक ने बड़ी कामयाबी हासिल की है. उन्होंने जम्‍मू एवं कश्‍मीर माध्‍यमिक शिक्षा बोर्ड की ओर से आयोजित 10वीं की परीक्षा पास की है.

ध्यान रहे जुलाई 2016 में हिजबुल कमांडर बुरहान वानी के मारे जाने के बाद भड़की हिंसा में सुरक्षाबलों की कार्रवाई में इंशा सहित कई लोगों ने अपनी आँखे खो दी. इंशा जब अपने घर की खिड़की से बाहर हो रहे प्रदर्शन को देख रही थी. इसी दौरा पैलेट गन से निकली गोली ने उनकी आंखों की रेटिना और ऑप्टिक नर्व को हमेशा के लिए क्षतिग्रस्‍त कर दिया.

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इंशा को आंखों के कई बड़े अस्‍पतालों में उसे इलाज के लिए ले जाया गया, 6 बार ऑपरेशन भी हुए, पर उनकी रोशनी नहीं लौट सकी. इंशा को इलाज के लिए एम्स के जयप्रकाश नारायण ट्रॉमा सेंटर में भर्ती करवाया गया था. उस दौरान डॉक्टरों ने कहा था कि पेलेट गन के छर्रों से इंशा एक हद तक अंधी हो चुकी हैं. अब कॉर्निया ट्रांसप्लांट से भी उसकी आंखें ठीक नहीं हो सकतीं.

अपनी कामयाबी पर इंशा ने कहा, “मेरे लिए यह बहुत मुश्किल था लेकिन मैं बहुत खुश हूं. मैंने बोर्ड इम्तिहान पास कर लिया है. अब आगे की पढ़ाई के लिए तैयार हूं.” इंशा ने आँखे गंवाने के बाद अपन एग्जाम की तैयारी के बारें में बताते हुए कहा कि हर दिन मेरे घर तीन ट्यूटर आते थे. वे मुझे टेक्स्ट बुक पढ़कर सुनाते थे. मैं उसे अगले दिन दोहराती थी. लेकिन गणित के विषय में ऐसा मुमकिन नहीं था. इसलिए गणित के बजाय संगीत का विषय चुना. इंशा ने बताया, वह अब ब्राइल लिपि सीख रही है.

राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी ट्वीट कर इंशा को बधाई दी है और लिखा है कि साल 2016 में सुरक्षाबलों के पेलेट गन का शिकार होने और आंखों की रोशनी गंवाने के बावजूद इंशा ने न केवल हिम्मत का परिचय दिया है बल्कि 10वीं की बोर्ड इम्तिहान पास कर मिसाल पेश की है. अब्दुल्ला ने लिखा है, “अल्लाह तुम्हें तुमारे कठोर परिश्रम और साहस का उचित इनाम दें.”

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