Innocent Muslims released from prison,

आतंकवाद के नाम पर फंसाए गए बेगुनाहों के लिए अदालतों के साथ-
साथ सड़क पर भी लड़ना होगा- मुहम्मद शुऐब
सपा की वादा खिलाफी के खिलाफ रिहाई मंच का प्रदेश व्यापी आंदोलन शुरू

आजमगढ़ । आतंकवाद के नाम पर बेगुनाह मुस्लिम नौजवानों को फंसाए जाने का सिलसिला तब तक नहीं रूकेगा जब तक इस सवाल पर व्यापक जनआंदोलन नहीं खड़ा होगा। इन मसलों को सिर्फ अदालती लड़ाई से नहीं जीता जा सकता। इसलिए जरूरी है कि अदालत के साथ-साथ सड़क पर भी अवाम उतरे। यह बातें रिहाई मंच के अध्यक्ष एडवोकेट मुहम्मद शुऐब ने संजरपुर आजमगढ़ में स्थानीय निवासीयों द्वारा उनके नागरिक अभिनन्दन के दौरान कहीं। इस अवसर उन्हें माला पहनाकर मोमेंटो दिया गया और शाॅल ओढ़ाया गया।
बटला हाउस फर्जी मुठभेड़ में मारे गए बेगुनाह नौजवानों के गांव वासियों को सम्बोधित करते हुए मुहम्मद शुऐब ने कहा कि समाजवादी पार्टी ने अपने चुनावी घोषणापत्र में वादा किया था कि वह सत्ता में आने के बाद बेगुनाहों पर से मुकदमें हटा लेगी लेकिन चार साल बाद भी सपा ने यह वादा पूरा नहीं किया। उल्टे अहमद हसन जैसे मुस्लिम मंत्रियों से यह अफवाह भी फैला रही है कि प्रदेश में एक भी मुस्लिम बेगुनाह जेल में बंद नहीं है। जो मुसलमानों को चिढ़ाने जैसा है। उन्होंने कहा कि इसी तरह आतंकवाद से बरी हुए मुस्लिम नौजवानों के पुर्नवास और मुआवजे के वादे से भी सरकार मुकर गई है। मुहम्मद शुऐब ने कहा कि रिहाई मंच और वे खुद भी जिन बेगुनाहों को अदालत से बरी कराने में कामयाब रहे हैं उसे वह उन बेगुनाहों पर किया गया एहसान नहीं मानते बल्कि एक इंसाफ पसंद संगठन और संविधान में यकीन रखने के नाते किया जाने वाला अपना फर्ज मानते हैं। लेकिन कुछ सरकार पोषित धार्मिक संगठन इन मुकदमों में मिली जीत का श्रेय लोगों को गुमराह करके लेने की कोशिश कर रहे हैं ताकि उनके नाम पर वह लोगों से चंदा इकठ्ठा कर सकें। जो एक तरह का धर्म के नाम पर किया जाने वाला भ्रष्टाचार है। उन्होंने कहा कि ऐसे कथित धार्मिक संगठनों का इतिहास हर कदम पर मौजूदा सरकारों के साथ खड़े रहने का रहा है। इसलिए लोगों को न सिर्फ ऐसे संगठनों से सचेत रहने की जरूरत है बल्कि उनसे मुकदमे लड़ने के नाम पर मिलने वाले चंदे का हिसाब भी मांगना चाहिए।
इस अवसर पर खालिद मुजाहिद जिनकी हत्या एटीएस और खुफिया विभाग के इशारे पर कर दिया गया और जिसमें पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह और पूर्व एडीजी कानून व्यवस्था बृजलाल भी हत्यारोपी हैं के चचा जहीर आलम फलाही ने भी सम्बोधिति किया। उन्होंने कहा कि बेगुनाहों की रिहाई के सवाल पर जबतक पूरा समाज एक साथ सरकारों के खिलाफ खड़ा नहीं होगा आतंकी घटनाएं भी नहीं रूकेंगी। उन्होंने कहा कि जिस तरह एडवोकेट मुहम्मद शुऐब ने हमलों को झेलते हुए भी इन मुकदमों को लड़ा और बेगुनाहों को छुड़ा रहे हैं वह एक मिसाल है।
वहीं रिहाई मंच के प्रवक्ता शाहनवाज आलम ने कहा कि रिहाई मंच सपा सरकार की वादा खिलाफी के खिलाफ प्रदेश व्यापी आंदोलन के पहले चरण के तहत आज आजमगढ़ में लोगों के बीच आया है। ताकि लोगों को सपा सरकार की वादा खिलाफी से अवगत कराकर लोगों से ऐसी सरकार को हमेशा के लिए बिदा कर देने का आह्वान कर सके। रिहाई मंच नेता शकील कुरैशी ने कहा कि रिहाई मंच इंसाफ पसंद अवाम के बीच जाकर आतंकवाद के नाम पर फंसाए जाने वाले बेगुनाहों के पक्ष में खड़े होने का आह्वान कर रहा है। क्योंकि सपा और भाजपा गुप्त गठबंधन के तहत प्रदेश से आईएस के नाम पर बेगुनाहों को फंसा रही हैं ताकि साम्प्रदायिक आधार पर समाज का विभाजन किया जा सके।
इंसाफ अभियान के महासचिव और इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्रनेता दिनेश चैधरी ने कहा कि आज दलितों और मुसलमानों पर सबसे ज्यादा हमले हो रहे हैं लिहाजा इन समाजों को आज एकजुट होकर चुनौतियों का सामना करना होगा। रिहाई मंच और इंसाफ अभियान इसी अभियान के तहत आज आजमगढ़ आया है।
इस मौके पर तारिक कासमी की फर्जी गिरफतारी के खिलाफ चले आंदोलन के नायक रहे तारिक शमीम ने कहा कि इस देश में आतंकवादी घटनाएं खुफिया एजेंसियों द्वारा भारत के मुसलमानों के खिलाफ छेड़ा गया अघोषित युद्ध है। बेगुनाहों की रिहाई साबित कर रही है कि इस युद्ध के वास्तविक अपराधियों को एजेंसियां बचा रही हैं। बम विस्फोटों में निर्दोष नागरिक मारे जा रहे हैं परंतु असली मुजरिमों को आजतक कानून के कटघरे में खड़ा नहीं किया गया और खाना पूर्ती के लिए बेगुनाहों को जेल भेज दिया गया जो इस देश की आतंरिक सुरक्षा के लिए खतरनाक है।
इस मौके पर अध्यक्षता करते हुए हरिमंदिर पांडेय ने कहा कि आतंकवाद के नाम पर बेगुनाह मुसलमानों को फंसाने के पीछे समाज को साम्प्रदायिक आधार पर बांटना है। जिससे कि जनता के वास्तविक सवाल राजनीति से गायब हो जाए। नागरिक अभिनन्दन और सम्मान समारोह का संचालन रिहाई मंच के आजमगढ़ प्रभारी मसीहुद्दीन संजरी ने की।
इस अवसर पर सालिम दाउदी, मोहम्मद आसिम, गुलाम अम्बिया, सुनील कुमार, अब्दुल्लाह एडवोकेट, हाजी बदरूद्दीन, फहीम, शाकिर, आमिर, शादाब उर्फ मिस्टर भाई, तारिक शफीक, मौलवी असलम, जितेंद्र हरि पांडेय, असलम खान, अबू शाद संजरी, शाहिद इकबाल समेत सैकड़ों लोग मौजूद थे।

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