15 12 2017 15highcourt

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धर्म परिर्वतन के सबंध में राजस्थान हाईकोर्ट ने शुक्रवार को 10 बिंदुओं की एक गाइडलाइन जारी करते हुए धर्म परिर्वतन के लिए जिला कलेक्टर को जानकारी देना अनिवार्य कर दिया.

जस्टिस गोपालकृष्ण व्यास और विनीत माथुर की खण्डपीठ ने धर्म परिवर्तन से जुड़े के मामले की सुनवाई करते हुए ये गाइडलाइन जारी की है. जिसमे जो कोई भी अपना धर्म परिवर्तन करना चाहता है, उसे पहले एक हफ्ते तक सरकारी नोटिस बोर्ड पर अपना नाम लिखना होगा और इस दौरान इस फैसले के खिलाफ लोग अपील भी कर सकेंगे. दोनों पक्षों को सुनने के बाद ही कलेक्टर धर्म परिवर्तन की अनुमति देगा.

अदालत ने कहा कि किसी भी धर्म परिवर्तन या अंतर धार्मिक शादी में दिशानिर्देशों का पालन नहीं होता है और इसे चुनौती दी जाती है, तो इसे खारिज किया जाता है. दिशा-निर्देश में कहा गया है कि तय उम्र के बाद कानून किसी को भी धर्म परिवर्तन की आजादी देता है, लेकिन इसके लिए वह खुद धर्म परिवर्तन की शर्तों से संतुष्ट होना चाहिए.

खण्डपीठ ने कहा, ‘भारतीय संविधान का अनुच्छेद 25 प्रत्येक नागरिक को धार्मिक स्वतंत्रता का आधारभूत अधिकार देता है. लेकिन साथ ही प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य भी बनता है कि वह अन्य धर्मों की भावनाओं का सम्मान करें और संविधान के खिलाफ आचरण न करें.’

ध्यान रहे जोधपुर की युवती पायल सिंघवी उर्फ़ आरिफा के मामले में हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार से धर्म परिवर्तन के कानून की जानकारी मांगी थी. ऐसे में अब कोर्ट ने कहा, जब तक प्रदेश सरकार धर्म परिवर्तन को लेकर कोई कानून नहीं बना लेती, तब तक हाईकोर्ट का यह दिशा-निर्देश ही प्रभावी रहेगा

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