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रामपुर में समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता आज़म खान की मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी को इंडियन आर्मी की और से टी -55 टैंक उपहार में दिया गया है. इससे पहले यूनिवर्सिटी को चाबुक टैंक भी मिल चूका है.

सोवियत संघ के समय का यह टैंक 1971 में बांग्लादेश लिबरेशन वॉर के दौरान बसंतपुर की लड़ाई में अपना जौहर दिखा चुका है. जौहर यूनिवर्सिटी एक निजी शिक्षण संस्थान है, जिसे आजम चलाते हैं. आजम इस संस्थान के संस्थापक और चासंलर भी हैं.

ध्यान रहे पिछले साल आजम खान ने सेनाध्यक्ष बिपिन रावत से जौहर यूनिवर्सिटी के लिए एक जंगी टैंक मांगा था. उन्होंने कहा था कि सेना से ऐसा टैंक मांगा गया जो अत्याधुनिक तकनीकों से लैस हो, जिससे कि छात्रों को सेना के हथियारों के बारे में जानकारी दी जा सके.

टी-55 युद्धक टैंक का वजन 36 टन है और इसमें एक 100 एमएम कैलिबर गन, 2 7.62 कैलिबर मशीनगन और एक 2.7 एमएम एंटी-एयरक्रॉफ्ट गन लगे हुए हैं. यह रात में भी काम कर सकता है और खुद को किसी भी तरह के न्यूक्लियर, बॉयोलॉजिकल और केमिकल हमलों का सामना करने में सक्षम है.

ले. जनरल हरीश ठुकराल ने एक समारोह में यह टैंक खान को सौंपा. बताया गया है कि टैंक को विश्वविद्यालय की मुख्य इमारत के ठीक सामने लगाया गया है.

इस बारे में आजम खान ने कहा कि वह एक सच्चे देशभक्त हैं. उन्होंने कहा, ‘मेरे मन में सेना के लिए बहुत सम्मान है. मैं कैंपस में वायुसेना के विमान और फाइटर जेट भी लाना चाहता हूं. मैं चाहता हूं कि ज्यादा से ज्यादा युवा सेना में शामिल होने के लिए प्रेरित हों.

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