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उत्तर प्रदेश में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने इंसानियत शब्द का नाम ही बदनाम कर दिया है. दलित होने की गलती की सज़ा इस मरीज़ को मिली. आज जो मामला सामने आया है. पहले डॉक्टर ने मरीज़ से पुचा की क्या तुम दलित हो? मरीज़ के हाँ केघने के बाद डॉक्टर ने ईलाज की बात तो छड़ो मरीज़ को छूने तक से इनकार कर दिया. इतना ही नहीं सरकारी अस्पताल के इस डॉक्टर ने मरीज को स्ट्रेचर से धक्का भी दे दिया.

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, यह शैतानियत वाला मामला यूपी के जौनपुर जिले का है. पीड़ित मरीज से डॉक्टर द्वारा हुई बद्सलूखी के बाद मरीज़ के रिश्तेदारों ने अस्पताल के डॉक्टर पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मछलीशहर के परसूपुर के रहने वाले केशल प्रसाद अपने पिता नरेंद्र प्रसाद के ईलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर आए थे.

आपको बता दें कि, अब उनका आरोप है कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मछलीशहर के डॉक्टर ने उनके बुजुर्ग पिता को छूने से इनकार कर दिया. डॉक्टर ने मरीज को छूने के एवज में उनसे 1000 रुपए की मांग की. डॉक्टर ने उनसे कहा कि वो दलित है इसलिए उसे छूने के लिए 1000 रुपए लगेंगे.

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पीड़ित केशव प्रसाद का कहना है कि बीते गुरुवार (17 मई) को वह अपने पिता को गंभीर हालत में लेकर सामुदियाक अस्पताल लेकर गये.  हालत नाजुक होने की वजह से उन्होंने खुद अस्तपाल में अपने पिता को स्ट्रेचर पर लिटाया और फिर डॉक्टर से तुरंत उनका इलाज शुरू करने को कहा. लेकिन तब वहां मौजूद डॉक्टर ने जातिसूचक शब्दों से उनका अपमान किया और मरीज को छूने तक से इनकार कर दिया.

आपको बता दें कि, मरीज के रिश्तेदारों ने जब डॉक्टर की इस बात विरोध किया तो डॉक्टर भड़क गए. साथ ही केशव प्रसाद का यह भी आरोप है कि डॉक्टर ने स्ट्रेचर पर पड़े उनके पिता को जोर से धक्का दे दिया. जिसके बाद स्ट्रेचर से गिरने से उसके पिता की मौत हो गयी. अब मरीज़ का परिवार और उनके परिजन डॉक्टर के खिलाफ कार्यवाही की मांग कर रहे है.

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