2002 के गुजरात दंगे के दौरान नरोदा गाम नरसंहार मामले की हो रही सुनवाई के दौरान एसआईटी अदालत में एक गवाह ने कहा है कि उसने हिंसक भीड़ में बजरंग दल नेता बाबू बजरंगी और विहिप नेता जयदीप पटेल को नहीं देखा था.

याद रहे बजरंगी और पटेल इस मामले में प्रमुख आरोपी हैं. दोनों पर 11 लोगों की हत्या की आरोप है. किशन ने कोर्ट से कहा कि 28 फरवरी 2002 की सुबह जब भीड़ ने पीडि़तों पर हमला किया था, तब वह दो बार नरोदा गाम बाजार गया था. लेकिन उसने वहां स्थिति को नियंत्रण में पाया था. हालांकि दोपहर करीब डेढ़ बजे भीड़ को क्षेत्र में दंगा करते देखा लेकिन भीड़ में बजरंगी, जयदीप और क्षेत्र के भाजपा पार्षद वल्लभ पटेल नहीं थे.

नरौदा गाम नरसंहार दंगों के नौ बड़े मामलों में से एक है, जिसकी एसआईटी जांच कर रही है. अल्पसंख्यक समुदाय के 11 लोगों की नरौदा गाम नरसंहार में हत्या की गई थी. ये घटना गोधरा ट्रेन अग्निकांड के विरोध में किए गए बंद के आह्वान के दौरान हुई थी.

इस मामले में कुल 82 लोग मुकदमे का सामना कर रहे हैं. इसमें गुजरात की पूर्व भाजपा मंत्री माया कोडनानी आरोपियों में शामिल हैं. पिछले साल सितंबर में सुप्रीम कोर्ट ने विशेष अदालत को छह महीने में मुकदमा की सुनवाई पूरी करने का आदेश दिया था.

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