Monday, October 25, 2021

 

 

 

शाने रिसालत और मुस्लिम बच्चियों की सुरक्षा हेतु उलेमा ए अहले सुन्नत की हुई अहम बैठक

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मुंबई: शनिवार को सुन्नी बिलाल मस्जिद छोटा सोनपुर में मुस्लिम बच्चियों के धर्म त्याग की और बढ़ते कदम की रोकथाम और तहफ्फुज ए नामुस ए रिसालत को लेकर उलेमा ए किराम की महत्वपूर्ण बैठक हुई। जिसमे उपरोक्त विषय पर विचार हुआ कि हर समय मुसलमानों की भावनाओं को ठेस पहुंचाई जा रही है।

बैठक में इस बात को लेकर भी सवाल उठा कि इस्लाम और पैगंबर ए इस्लाम को क्यूँ निशान बनाया जा रहा है। ऐसा लगता है कि सरकार इन असामाजिक तत्वो के पीछे खड़ी है। अगर ऐसा नहीं होता तो हर दिन मुसलमानों के जज़्बात को नुकसान नहीं पहुंचाया जाता। ऐसे लोगों को सरकार सरेआम खुले में घूमने नहीं देती। हर कोई आज इस्लाम को दहशतगर्दी से जोड़ देता है। ऐसे लोगों का उद्देश्य शांति, अमन और भाईचारे को तबाह और बर्बाद करना है। इस दौरान राजधानी दिल्ली में हाल ही में पिंकी चौधरी द्वारा पैगंबर ए इस्लाम की शान में अपमानजनक टिप्पणी की। जो नाकाबिल ए माफी जुर्म है।

उपरोक्त सवालो को बैठक में उलेमा ए अहले सुन्नत ने मोईन उल मशाईख हजरत अल्लामा मौलाना सय्यद मोईनउद्दीन अशरफ साहब और अल्हाज मुहम्मद सईद नूरी के सामने रखा और कहा कि भारत सरकार से इस्लाम धर्म और मुसलमानों को निशाना बनाने वालों और सांप्रदायिक सोहार्द को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने, तहफ्फुज ए नामुस ए रिसालत बिल को तत्काल पास करने की मांग करे।

हजरत मौलाना सय्यद मोईन मियां ने उलेमा ए किराम से कहा कि आल इंडिया सुन्नी जमात उल इलमा और रज़ा एकेडमी हालात पर नजर बनाए हुए है और गुस्ताख़ पिंकी चौधरी के खिलाफ मुंबई के डोंगरी स्टेशन में एडिशनल पुलिस कमिशनर सुनील कुमार कोहले साहब के आदेश पर एफ़आईआर दर्ज हो चुकी है। उन्होने कहा, मुंबई से उम्मीद है कि वह जल्द ही कार्रवाई करेगी। उन्होने उलेमाओं से अपील की वे मस्जिदों और मदारिस के जरिये अमन बहाली में लगे रहे और लोगों को सब्र से काम लेने की तलकीन करते रहे।

वहीं नूरी साहब ने मुफ़्ती ए आजम यूरोप अल्लामा मुफ़्ती शफीक उर रहमान साहब का हवाला देते हुए कहा कि ह्ंदुस्ताँ की हालत अनार की तरह दिखाई दे रही है। उन्होने कहा, आज इस्लाम के दुश्मन पूरी प्लानिंग के जरिये मुस्लिम बच्चियों को बरगला रहे है और बहला फुसला कर इस्लाम से दूर कर रहे है। हमे इस मसले पर भी गौर करने की जरूरत है कि आज हमारी कौम की बच्चियाँ गैर मुस्लिमों से शादी करने पर मजबूर क्यों है। इससे निपटने के लिए भी मुस्लिमों को एकजुट होना होगा।

इस दौरान मौलाना नुरुल एन, मौलाना खलीलऊर रहमान नुरी, मौलाना अमानउल्लाह, मौलाना मुहम्मद अब्बास रजवी,  मौलाना जफरुद्दीन रजवी, मौलाना वलीउल्लाह शरीफ़ी, मौलाना महमूद आलम रशीदी, मौलाना मुश्ताक अहमद तेगी, मौलाना मुहम्मद उमर निजामी, मौलाना इरफान अलीमी, मौलाना अब्दुल रहीम अशरफी, मौलाना रजब अली फेजी आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

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