फिल्म दंगल में पहलवान गीता फोगाट के बचपन की भूमिका निभाने वाली 16 वर्षीय जायरा वसीम मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती की मुलाक़ात के बाद से ही नेशनल न्यूज़ की ब्रेकिंग बनी हुई हैं.

दरअसल, दो दिन पहले ही जायरा वसीम का 10वी बोर्ड का रिजल्ट घोषित हुआ था. जायरा ने इसमें 92 फीसदी से ज्यादा अंक हासिल किये. इसके बाद राज्य की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती ने जायरा से मुलाक़ात की थी. इसी मुलाक़ात को लेकर जायरा सोशल मीडिया पर ट्रोल हुई.

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सोशल मीडिया पर जायरा की महबूबा मुफ़्ती से मुलाक़ात को लेकर आलोचना की गई. आलोचक महबूबा मुफ़्ती को हाल में घाटी में हुई हिंसा के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए जायरा की महबूबा मुफ़्ती से मिलने पर आलोचना कर रहे थे. जिसके बाद फेसबुक पर पोस्ट लिखकर माफी मांगते हुए कहा कि वो खुद को कश्मीरी युवाओं का रोल मॉडल नहीं मानती हैं. हालांकि उन्होंने इस पोस्ट को बाद में डिलीट कर दिया था.

अब इस मुद्दें पर चैनल टाइम्स नाउ पर हुई बहस में जम्मू-कश्मीर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सचिव पीरजादा मोहम्मद अमीन शाह ने जायरा को नसीहत देते हुए कहा कि अगर वह मुसलमान है तो उसे इस्लाम की शिक्षाओं पर अमल करना चाहिए.

शाह ने कहा, “अगर जायरा मुसलमान है और इस्लाम में यकीन रखती है तो उसे उसी अनुसार रहना होगा…अगर वो मुसलमान है तो उसे कुरान की कमांडमेंट फॉलो करना चाहिए. उसे मुसलमान की तरह रहना चाहिए…केवल नाम होने से कोई मुसलमान नहीं हो जाता.”

शाह ने टीवी चैनल पर कहा कि जिन लड़कियों के लिए मैगजीन में सेक्सी और बॉम्ब सेल जैसे लफ्जों का इस्तेमाल होता है वो रोल मॉडल नहीं हो सकतीं. शाह ने मीडिया पर एक मामूली बात को मुद्दा बनाने का भी आरोप लगाया.

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