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महाराष्ट्र के औरंगाबाद में दो समुदायों के बीच हुई सांप्रदायिक हिंसा के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे है. जिसमे पुलिस दंगाईयो के साथ नजर आ रही है. बता दें कि इस हिंसा में दो लोगों की मौत हुई है.

वीडियो में साफ दिख रहा है कि पुलिस के मौजूदगी में दंगाई बवाल मचा रहे है. लेकिन पुलिस कार्रवाई करने के बजाय दंगाइयों को मौन समर्थन देती हुई दिख रही है. पुलिस की मौजूदगी में दंगाई गाड़ियों को आग के हवाले कर देते हैं.

वीडियो उस समय का है जब दंगाई नवाबपुरा में वाहनों और दुकानों में आग रहे थे. पुलिसवालों ने दंगाइयों को रोकने की कोई कोशिश नहीं की बल्कि उनके साथ खड़े दिए. ये वीडियो दंगों के समय किसी ने घर की खिड़की या बालकनी से 9 मिनट का  रिकॉर्ड किया जिसमें 10 पुलिसवाले दंगाइयों का साथ देते दिख रहे हैं.

दंगाई सड़क पर खड़ी गाड़ियों के शीशे तोड़ देते हैं और उसके बाद गाड़ियों को फूंक दिया जाता है. जिस वक्त ये सब हो रहा है उस वक्त पुलिस आस-पास ही है, लेकिन इन दंगाइयों को कोई नहीं रोकता.

पुलिस आयुक्त मिलिंद भारांबे ने वीडियो को लेकर कहा कि ये मामला काफी गंभीर है और हम इस ममाले में जांच कर रहे हैं. उन्होंने आश्वासन देते हुए कहा कि कोई भी दोषी पुलिस कर्मी या अन्य आरोपी को नहीं बख्शा जाएगा.

वहीं अतिरिक्त डीजीपी बिपिन बिहारी जो औरंगाबाद में स्थिति का जायजा लेने के लिए गए थे, उन्होंने कहा कि कोई भी पुलिस कर्मी जो इस हिंसा में शामिल है उसे कानून अपने हाथ में लेने के आरोप में सजा दी जाएगी.

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