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जुलाई के महीने में सुरक्षा बलों के हाथों हुई हिजबुल कमांडर बुरहान वानी की मौत के बाद घाटी में जारी हिंसा पूरी तरह समाप्त भी नहीं हुई थी कि अब फिर से घाटी में विरोध-प्रदर्शनों का दौर शुरू हो चूका हैं. ये विरोध-प्रदर्शन पश्चिम पाक शरणार्थियों को डोमिसाइल सर्टिफिकेट (अधिवास प्रमाणपत्र) देने के मुद्दे पर हो रहे हैं. इस शरणार्थियों में ज्यादातर हिंदू समुदाय के लोग हैं.

अलगाववादी नेताओं ने सरकार के  शरणार्थियों के लिए “अधिवास प्रमाण पत्र” जारी करने के कदम के खिलाफ शुक्रवार को कश्मीर के विभिन्न भागों में विरोध प्रदर्शन किये. साथ ही उन्होंने राज्यव्यापी आंदोलन की धमकी भी दी. इस दौरान कई जगह पर प्रदर्शकारियों की सुरक्षा बलों से झड़पें भी हुई.

इस  फैसले को लेकर कश्मीर आर्थिक एलायंस के अध्यक्ष मुहम्मद यासीन खान ने कहा, “राज्य सरकार धारा 370 गिराए के लिएय  लोगों के हितों के खिलाफ काम कर रही है.” उन्होंने आगे कहा कि यह एक साजिश है जिसके तहत जम्मू-कश्मीर की जनसांख्यिकी को बदलने की और इस राज्य को मुस्लिम अल्पसंख्यक बनाने की.

वहीं वाणिज्य और उद्योग चैंबर कश्मीर के अध्यक्ष मुश्ताक अहमद वानी ने कहा कि वे अधिवास प्रमाण पत्र जारी करने का विरोध करते हुए कहा कि आधार कार्ड जो देश भर में पहचान पत्र के रूप में पहले से ही मान्य हैं ऐसे में अधिवास प्रमाण पत्र को शुरू करने की क्या जरूरत हैं?


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