शिमला.मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर की आज सेवानिवृत्ति हो गए हैं. इस अवसर पर शनिवार को हाईकोर्ट में फुलकोर्ट एड्रेस का आयोजन किया गया था. इस दौरान उन्होंने कहा कि उन्होंने हिमाचल प्रदेश के लोगों से बहुत कुछ सीखा और बहुत कुछ पाया हैं.

उन्होंने कहा कि न्यायपालिका लोकतंत्र की रीढ़ की तरह है. संविधान के तहत किसी को भी इसकी निष्पक्षता निडरता को आघात पहुंचाने का हक नहीं दिया गया है. कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के पद के लिए नामित न्यायाधीश संजय करोल ने कहा कि न्यायाधीश मीर केवल उत्तम जज हैं बल्कि एक नेक इंसान भी हैं. उन्होंने कई ऐतिहासिक फैसले दिए. उन्होंने आम जनता तक न्याय पहुंचाया.

मीर ने हि.प्र. उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश का कार्यभार 27 नवम्बर, 2013 को संभाला था. हिमाचल प्रदेश में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने समाज के बड़े वर्ग तथा राज्य हित के मामलों में अनेक महत्वपूर्ण फैंसले लिए. उच्च न्यायालय में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने न्यायालय में मुकदमों की लंबितता को कम करने के लिए भरसक प्रयास किए. परिणामस्वरूप हि.प्र. उच्च न्यायालय में लम्बित मामलों की संख्या 59133 से घटकर 29800 तक पहुंच गई, जबकि 5 वर्ष से अधिक पुराने लम्बित मामलों की संख्या 10135 से घटकर 6735 पर आ चुकी है.

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इस दौरान उन्होंने एकल बेंच के 3196 मामलों सहित कुल 35710 मामलों का निपटारा किया. मोटर वाहन अधिनियम के अन्तर्गत 72 करोड़ रुपये, जबकि भूमि अधिग्रहण अधिनियम के तहत 10-15 करोड़ रुपये की राशि वसूली गई. हि.प्र. उच्च न्यायालय में मार्च, 2012 से अप्रैल, 2017 की अवधि के दौरान 25 लोक अदालतों का आयोजन किया गया, जिनमें 2382 मामले आए और 390 का निपटारा किया गया. मध्यस्थता व्यवस्था को विशेष तवज्जो प्रदान की गई और राज्य में इस व्यवस्था के तहत सुनवाई के लिये 6996 मामले आए, जिनमें से 1638 का निपटारा किया गया.

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