दिल्ली उच्च न्यायालय ने राष्ट्रीय राजधानी में वक्फ की 300 से अधिक संपाियों का केंद्र द्वारा अधिग्रहण किये जाने को चुनौती देने वाली एक जनहित याचिका पर आज केंद्र से जवाब तलब किया है.

याचिका में उन वक्फ संपतियों का कब्जा फिर से वक्फ को देने की मांग की गई है जिनका कथित रूप से सरकार ने कोई मुआवजा दिए बिना अधिग्रहण कर लिया था.  कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश गीता मिाल एवं न्यायमूर्त हरि शंकर की पीठ ने उपराज्यपाल, आप सरकार और दिल्ली वक्फ बोर्ड को भी इस याचिका पर नोटिस जारी किया है.

मुस्लिम परिवार में शादीे करने के इच्छुक है तो अभी फोटो देखकर अपना जीवन साथी चुने (फ्री)- क्लिक करें 

पीठ ने संबंधित प्राधिकारियों को सुनवाई की आगामी तिथि 11 दिसंबर से पहले स्थिति रिपोर्ट दायर करने का निर्देश दिया है. याचिकाकर्ता अधिवक्ता शाहिद अली ने कहा कि केंद्र के संबंधित अधिकारियों के इरादे बदनीयती वाले है. साथ ही , न्याय के सिद्धांतों के विपरीत और नागरिकों के मौलिक अधिकारों का खुला उल्लंघन है.

याचिका में कहा गया कि जब कोई भी सरकार सरकार द्वारा जमीम अधिग्रहित करती है, तो उसके मालिक को एक मुआवजा मुआवजा दिया जाता है. लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं किया गया. क्योंकि इस जमीन का मालिक खुदा है और खुदा को मुआवजा नहीं दिया जा सकता. इसलिए कोई अधिग्रहण नहीं किया जा सकता.

याचिका में कहा गया, वक़फ़ अधिनियम 1995 की धारा 51 के तहत सरकार द्वारा या संस्था द्वारा क़फ़ जमीन का आबंटन या उसका अधिग्रहण शून्य है. ऐसे में वक्फ की संपत्तियों को दिल्ली वक्फ बोर्ड के पक्ष में बहाल करने की मांग की गई.

Loading...