डेरा समर्थकों की हिंसा पर पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने हरियाणा की बीजेपी सरकार को लगातार दुसरे दिन कड़ी फटकार लगाई है. कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि राजनीतिक लाभ के लिए हिंसा पर रोक नहीं लगाई गई.

कोर्ट ने कहा कि सरकार ने राजनीतिक फायदे के लिए शहर को जलने दिया. ऐसा लगता है कि सरकार ने सरेंडर कर दिया. साथ ही कोर्ट ने अब चेतावनी भी जारी की और कहा, कोई भी संगठन अगर लॉ ऐंड ऑर्डर के खिलाफ जाएगा तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी.

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ध्यान रहे पंचकूला की सीबीआई अदालत द्वारा शुक्रवार को डेरा प्रमुख बाबा राम रहीम को 15 साल पुराने अपनी ही साध्वियों से रेप के मामले में दोषी करार देने के बाद भड़की हिंसा में पंचकूला और सिरसा में कम से कम 31 लोगों की मौत हो गई.

कोर्ट ने सरकार से पूछा कि जब डेरा प्रमुख के साथ आने वाली गाड़ियों की संख्या तय थी तो 100 से ज्यादा कारें उनके काफिले में कैसे पहुंच गईं? इससे पहले शुक्रवार को ही कोर्ट ने पूछा था कि इंटेलिजेंस इनपुट्स होने के बावजूद सरकार ने भीड़ को काबू करने के लिए पर्याप्त कदम क्यों नहीं उठाए? धारा 144 लागू होने के बावजूद इतनी बड़ी तादाद में लोग पंचकूला कैसे पहुंच गए?

जिस पर खट्टर सरकार ने बताया कि अधिकारियों ने ऐसा बताया था. इससे नाराज कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार उन अधिकारियों के नाम सार्वजनिक करे जिन्होंने सरकार को गुमराह किया. अदालत ने आदेश दिया कि कोई भी राजनीतिक, सामाजिक या धार्मिक नेता कोई भड़काऊ बयान नहीं दे और अगर कोई ऐसा करता है तो उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाए.

बेंच ने आदेश में कहा, स्थिति से निपट रहे अधिकारी बिना भय के और निष्पक्षता के साथ अपना काम करे. अगर कोई अधिकारी कर्तव्य के निर्वहन में चूकता है तो उसके खिलाफ अदालत कड़ी कार्रवाई करेगी.

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