Monday, November 29, 2021

बहादुरी के लिए मिला था वीरता पदक, NHRC ने एनकाउंटर को पाया फर्जी

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एमपी के आईपीएस अफसर से वीरता पदक छीना, 15 साल पुराना एनकाउंटर बना वजह

मध्य प्रदेश के आईपीएस अफसर और रतलाम रेंज में डीआईजी पद पर पदस्थ धर्मेंद्र चौधरी को मिला वीरता पदक महामहिम राष्ट्रपति ने छीन लिया है.

धर्मेंद्र चौधरी को 2002 में झाबुआ में पदस्थ रहने के दौरान कुख्यात बदमाश लोहान को एनकाउंटर में मार गिराने को लेकर ये वीरता पदक प्रदान किया गया था. राष्ट्रपति ने 2004 में चौधरी को इस वीरता पदक से सम्मानित किया था. हालांकि अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की जांच में ये एनकाउंटर फर्जी पाया गया है.

एनकाउंटर के करीब छह साल बाद राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने इस मामले की जांच शुरू की थी. आयोग ने अपनी जांच में इस एनकाउंटर को फर्जी करार दिया,  जिसके बाद राष्ट्रपति सचिवालय ने 30 सितंबर को पदक वापसी की अधिसूचना जारी कर दी.

भारत सरकार के 30 सितंबर 2017 के राजपत्र में राष्ट्रपति सचिवालय की ओर से जारी अधिसूचना में धर्मेंद्र चौधरी का पुलिस वीरता पदक रद्द करते हुए उसे जब्त करने को कहा गया है.

इस बारे में धर्मेंद्र चौधरी ने कहा अभी राष्ट्रपति सचिवालय से जारी आदेश नहीं मिला है. उन्होंने कहा कि यदि पुलिस मुख्यालय इस बारे में उनसे कोई जवाब मांगेगा, तो वे अपना पक्ष रखेंगे. राज्य सरकार ने इस एनकाउंटर को सही बताया था.

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