Thursday, June 17, 2021

 

 

 

राम मंदिर के लिए चंदा अभियान के दौरान अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा पर हाईकोर्ट ने शिवराज सरकार से मांगा जवाब

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इंदौर, उज्जैन और मंदसौर में राम मंदिर निर्माण के लिए चंदा अभियान के दौरान अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट (MP High Court) की इंदौर पीठ (Indore Bench) ने राज्य की शिवराज सरकार को नोटिस जारी कर 6 हफ्तों के भीतर जवाब मांगा है। इंदौर हाईकोर्ट ने मामले में मुख्य सचिव, डीजीपी और तीनों जिलों के कलेक्टर, एसपी को नोटिस जारी किए है।

राज्यसभा सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह (Digvijay Singh) द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश मोहम्मद रफीक और न्यायमूर्ति सुजॉय पॉल की पीठ ने ये नोटिस जारी किया है। याचिका में भीड़, सांप्रदायिक हिंसा और मॉब लिंचिंग के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लागू करने के लिए राज्य को निर्देश जारी करने की मांग की गई।

जनवरी के पहले सप्ताह में सिंह ने भोपाल में राज्य के तीन जिलों में हो रही हिंसा को लेकर अल्पसंख्यक समुदायों के प्रतिनिधियों से मुलाकात के बाद याचिका दायर की थी। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए धन इकट्ठा करने के लिए मुस्लिम बहुल इलाकों में हिंदुत्व समूहों द्वारा रैलियां निकालने के बाद हिंसा भड़क गई। रैलियों के दौरान, धन संग्रहकर्ता भड़काऊ नारों और मुसलमानों के खिलाफ हिंसा में शामिल थे।

सिंह ने खुशी जाहिर की है कि हाईकोर्ट ने उनकी याचिका पर संज्ञान लेते हुए सरकार को नोटिस जारी किया है। अपने ट्वीट में उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने सांप्रदायिक हिंसा के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों का पालन किया होता, तो ऐसी घटना नहीं होती।

सिंह की याचिका में इन घटनाओं के बारे में बात की गई और आरोप लगाया कि सरकार की लापरवाही ने हिंसा को होने दिया। इअधिकारियों ने न केवल लापरवाही से काम किया, बल्कि “गलतियों के खिलाफ कोई कार्रवाई किए बिना पूरी घटना को देखा”।

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