268613 karol bagh

दिल्ली के करोल बाग में 108 फुट ऊंची हनुमान की मूर्ति को सार्वजनिक भूमि का अतिक्रमण कर बनाने की अनुमति देने के मामले को हाई कोर्ट ने दुर्भाग्यपूर्ण और पीड़ाजनक करार दिया। इतना ही नहीं कोर्ट ने ये भी कहा कि आपराधिक गतिविधियों से कोई भी आध्यात्मिकता जुड़ी नहीं हो सकती है।

सोमवार को सुनवाई के दौरान कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल और जस्टिस सी. हरिशंकर की एक पीठ ने कहा कि यदि किसी भी व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा चलाया जाता है, तो संबंधित अदालत यह सुनिश्चित करेगी कि मामला शीघ्रता से निपटाया जाएगा और दोषी को न्याय के कटघरे में लाया जाएगा।

अदालत ने कहा कि इस मामले में भूमि का स्वामित्व रखने वाली एजेंसियों ने बहुत दुर्भाग्यपूर्ण कदम उठाया है क्योंकि उनमें से कोई भी यह कहने के लिए आगे नहीं आया है कि यह भूमि उनकी है। अदालत ने सीबीआई को इस मामले में एक मासिक स्थिति रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए।

मुस्लिम परिवार में शादीे करने के इच्छुक है तो अभी फोटो देखकर अपना जीवन साथी चुने (फ्री)- क्लिक करें 

अदालत ने इस मामले में वरिष्ठ अधिवक्ता दयान कृष्णन और अधिवक्ता गौतम नारायण को न्यायमित्र के रूप में भी नियुक्त किया। अदालत ने डीडीए से एक स्थिति रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा. मामले की अगली सुनवाई छह सितंबर को होगी।

बता दें कि इससे पहले कोर्ट ने पिछले साल मई में अवैध निर्माण के लिए नियुक्त समिति के बाद अतिक्रमण में पुलिस को जांच का आदेश दिया था। जांच में पूरे दिल्ली में डीडीए भूमि पर 1,170 वर्ग गज की दूरी पर अतिक्रमण की ओर इशारा किया था। जिसके बाद कोर्ट ने यूको बैंक को निर्देश दिया था कि ट्रस्ट के खाते को सीज कर दिया जाए. बैंक में सिर्फ जमा करने की अनुमति है, निकालने की अनुमति किसी को नहीं है।

कोर्ट ने इस दौरान पाया था कि विभिन्न एजेंसियों में तैनात अधिकारी सार्वजनिक जमीन को बचा सकते थे, लेकिन उन्होंने अपने अधिकारों का दुरुपयोग किया। कोर्ट ने अधिकारियों को फटकार लगाते हुए कहा था कि आपके पास अधिकार हैं, लेकिन आपने अपनी क्षमता के हिसाब से काम नहीं किया।

Loading...