गुजरात: उना के पास के गाँवों से दलितों का पलायन, दलितों को हैं जान का खतरा

5:16 pm Published by:-Hindi News

उना गुजरात में दलित विरोधी हिंसा का केंद्र रहा है।

उना कांड के बाद शुरू हुए आन्दोलन में हिस्सा लेंने वालें दलितों को अब अगड़ी जातियों और गौरक्षकों से अपनी जान का खतरा पैदा हो गया है. ये परिवार डर के साये में जीने को मजबूर हैं. जिसके चलते इन लोगों को अपने गाँवों को छोड़ना पड़ रहा हैं.

इन्ही दलितों में से राजू परमार नाम के एक युवक ने 11 जुलाई को उना में दलितों के खिलाफ हिंसा के बाद राजू ने खुदकुशी की कोशिश की थी. हालांकि वह बच गए. लेकिन अब उन्हें जान से मारने की धमकिया मिल रही हैं.

राजू के अनुसार ‘जब मैं समतेर गांव लौटा तो कुछ गांववालों ने मुझे यह कहकर धमकाया कि तुम बच तो गए हो लेकिन हम तुम्हें और तुम्हारे परिवार को यहां नहीं रहने देंगे।’

उसने आगे कहा, ‘मैंने पुलिस की मदद मांगी जो मुझे 20 अगस्त को मिली. हम इस तरह से कैसे रह सकते हैं? हमारी रोजी-रोटी कैसे चलेगी? इसलिए मैंने अपनी दोनों भैंसों और टू-वीलर स्पेयर पार्ट शॉप के सभी सामान को बेचने के बाद दूसरे गांव जाकर बसने का फैसला किया.’

राजू अपनी पत्नी और तीन बेटों के साथ डुंगरपुट चले आए. उना की घटना के बाद गांव छोड़ने वाला राजू का पहला परिवार था.

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