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गुजरात विधानसभा के नवनियुक्त प्रोटेम स्पीकर और अनुभवी भाजपा विधायक निंबेन आचार्य और दो अन्य को मतदाताओं को खरीदने के दोष में एक साल की कारावास की सज़ा सुनाई गई है.

इस सभी को सोमवार को 2009 के चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन मामले में मोरबी मजिस्ट्रेट की अदालत ने ये सज़ा सुनाई है. हालांकि सभी को सज़ा के खिलाफ 30 दिनों के अंदर आदेश को चुनौती देने का अवसर दिया गया है. कच्छ जिले के भुज से विधायक आचार्य, पूर्व भाजपा विधायक कांति अमरुतिया और पाटीदार अनामत आंदोलन के संयोजक मनोज पानारा पर दो-दो हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है.

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गौरतलब है कि भुज से बीजेपी विधायक डॉ नीमाबेन आचार्य को गुजरात राज्य विधानसभा का प्रोटेम स्पीकर नियुक्त किया गया था. राज्यपाल ओ. पी. कोहली ने एक अधिसूचना जारी कर राज्य विधानसभा के अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं होने तक 70 वर्षीय आचार्य की इस पद पर नियुक्ति की थी.

एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की अदालत में जज जिग्नेश दमोदरा ने आचार्य, अमरुतिया और पनारा को आईपीसी की धारा 171 (B) (वोटर्स को लालच देना) और धारा 144 के तहत दोषी माना. हालांकि अदालत ने इन्हें सेक्शन 188 (लोक सेवक द्वारा सम्यक् रूप से प्रख्यापित आदेश की अवज्ञा) के आरोप से सबूत के अभाव में बरी कर दिया.

आप को बता दें कि यह मामला सौराष्ट्र के मोरबी संसदीय क्षेत्र में 2009 के लोकसभा चुनाव से जुड़ा है, जहां निंबेन, अमरुतिया और पानारा चुनाव प्रचार कर रहे थे. अमरुतिया मोरबी के पूर्व विधायक हैं. अदालत ने इन्हें 2009 के लोकसभा चुनाव में मतदाताओं को रिश्वत देने की कोशिश करने का दोषी पाया है.

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