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गुजरात में विधानसभा चुनावों में 6ठी बार जीत के बाद भी भारतीय जनता पार्टी की मुसीबत खत्म होने का नाम नहीं ले रही है. रविवार को नर्मदा नदी पर आदिवासी सम्मेलन में शामिल होने आए गुजरात के वन एवं पर्यावरण मंत्री गणपत वसावा को आदिवासियों का जबरदस्त विरोध झेलना पड़ा.

वसावा राजपीपला में आए थे. यहां पर आदिवासियों ने उनका जबरदस्‍त विरोध करते हुए उन पर पथराव कर दिया. साथ ही उनके खिलाफ जमकर नारेबाजी भी हुई. जिसके चलते उन्हें सम्मेलन बीच में ही छोड़कर जाना पड़ा. बताया जा रहा है कि आदिवासियों की जमीन से जुड़ी समस्याएं लंबे समय से लंबित हैं जिसके चलते आदिवासी सरकार से नाराज हैं.

ध्यान रहे गणपत वसावा सूरत की मांगरोल सीट से तीसरी बार विधायक बने हैं. वे गुजरात विधानसभा के स्‍पीकर भी रह चुके हैं. पिछली विधानसभा में भी वे ही स्‍पीकर ही थे. वसावा आदिवासी समाज से ही आते हैं और गुजरात विधानसभा के पहले आदिवासी स्‍पीकर थे.

15 हजार से अधिक लोगों की भीड़ की नारेबाजी के बीच वसावा को पुलिस ने जब बाहर निकाल कर उनकी गाड़ी में बिठाया तभी भीड़ ने पत्थरबाजी कर दी।इससे मंत्री की गाड़ी का पिछला शीशा टूट गया पर उन्हें कोई चोट नहीं आयी.

पुलिस ने इस संबंध में एक मामला दर्ज किया है पर किसी को पकड़ा अथवा हिरासत में नहीं लिया गया है. पुलिस अधिकारी ने बताया कि भारी भीड़ के बीच से मंत्री को सुरक्षित निकालना पहली प्राथमिकता थी. कार्यवाही बाद में होगी.