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गुजरात हाई कोर्ट ने नाबालिग मुस्लिम लड़की के निकाह पर कानूनी मुहर लगा दी हैं. एक मामलें में फैसला देते हुए गुजरात हाई कोर्ट ने मुस्लिम नाबालिग लड़की के निकाह को सही ठहराया हैं. साथ ही कोर्ट ने लिव-इन रिलेशनशिप के कॉन्ट्रैक्ट को गलत बताया हैं.

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि मुस्लिम लडकी की पहली माहवारी शुरू होने के बाद ही उसे शादी की इजाजत मिल जाती हैं. कोर्ट ने ये फैसला एक पुराने फैसले का आधार पर सुनाया हैं. जिसमे माहवारी शुरू होने के बाद एक मुस्लिम लड़की को शादी की इजाजत दे दी गई थी.

दरअसल, जैनुलाबेदिन गांजी और जामनगर की यह नाबालिग लड़की 9 नवंबर को घर से भाग गये थे. दोनों ने पहले तो निकाह कर लिया था. उसके बाद इन दोनों ने लिव-इन रिलेशनशिप का कॉन्ट्रैक्ट भी रजिस्टर्ड कराया. इसी बीच लड़की के पिता ने गांजी के खिलाफ किडनैपिंग की शिकायत दर्ज कराई.

सके बाद गांजी ने हाई कोर्ट का रुख किया और नाबालिग मुस्लिम लड़की का माहवारी शुरू होने के बाद अपनी मर्जी से किसी से शादी करना जायज होने को आधार बनाते हुए गांजी के खिलाफ आरोप को खारिज किया गया.


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