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गुजरात के पाटन ज़िले के कलेक्टर कार्यालय परिसर में ख़ुद को आग लगाने वाले दलित कार्यकर्ता की शुक्रवार रात मौत हो गई.

ध्यान रहे 61 वर्षीय वानकर ने दलितों को भूमि आवंटन में सरकार द्वारा कथित विलंब के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए गुरुवार की दोपहर कलेक्टर ऑफिस के सामने आत्मदाह कर लिया था. इलाज के लिए उन्हें अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां शुक्रवार को रात 10 बजे करीब वानकर की मौत हो गई.

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दलित कार्यकर्ता सुबोध परमार ने भानु वणकर की मौत की पुष्टि करते हुए बीबीसी गुजराती को बताया, अस्पताल में दाखिल होने के बाद से ही भानुभाई लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर थे. उनका शरीर 96 फ़ीसद झुलस गया था. भानु दलितों को दादुखा गांव में खेती के लिए ज़मीन दिए जाने की मांग कर रहे थे. उन्होंने चेतावनी दी थी कि अगर दलितों को ज़मीन नहीं मिली तो वो आत्मदाह कर लेंगे.

दलित कार्यकर्ता की मौत के बाद राष्ट्रीय दलित अधिकार मंच (आरडीएएम) ने वानकर की मौत को ‘सरकारी हत्या’ करार दिया है. साथ ही राज्य सरकार को चेतावनी दी कि वानकर की ‘हत्या’ में जिस किसी का भी हाथ है उसकी पहचान शनिवार शाम चार बजे तक हो जानी चाहिए, अगर ऐसा नहीं किया गया तो वे लोग अहमदाबाद-मेहसाणा हाइवे को जाम कर देंगे.

गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपाणी ने इस मामले में जांच के आदेश दे दिए हैं. सीएम ऑफिस की और से कहा गया, ‘दलित कार्यकर्ता द्वारा खुद को जलाए जाने से सीएम विजय रुपाणी काफी दुखी हैं, इसलिए यह ऐलान किया जा रहा है कि वानकर के पूरे इलाज का खर्च राज्य सरकार उठाएगी.

साथ ही पुरे मामले की जांच चीफ सेक्रेटरी की सौंपी गई है. सीएम ने कहा है कि जैसे ही जांच के बाद जानकारी सामने आएगी, इस घटना के पीछे जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

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