गुजरात के डांग जिले स्थित सुबीर तालुका के कदमाल गांव में बन रहे चर्च का निर्माण कार्य रोके जाने का मामला सामने आया है। दरअसल, गांव के ही निवासी संपत पवार आरोप लगाया कि गांव के इसाइयों ने चर्च बनाने के लिए स्थानीय देवताओं की मूर्तियों को नुकसान पहुंचाया। जिसके बाद इलाके में तनाव फ़ेल गया।

मौके पर पहुंची पुलिस ने जब इस पूरे मामले की जांच की तो आरोप झूठा पाया गया। पुलिस को नागदेव और वाघदेव की मूर्तियां सुरक्षित मिलीं। हालांकि पुलिस ने चर्च का निर्माण फिलहाल रुकवा दिया है। बताया जा रहा है चर्च इन मूर्तियों से 10 फीट की दूरी पर बनवाया जा रहा था।

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पुलिस का कहना है कि यह जमीन फॉरेस्ट रिजर्व एरिया के अंतर्गत आती है। पवार ने सुबीर पुलिस स्टेशन में शिकायत में कहा था कि गांव के पूर्व सरपंच गणपत चौधरी और उसके सहयोगी सुलेमान चौधरी, विनेश चौधरी, सुरेश चौधरी और गांव के सभी निवासियों ने सड़क के किनारे लगीं नागदेव और वाघदेव की मूर्तियों को नुकसान पहुंचाया है।

पवार का आरोप था कि ‘मूर्तियों को हटाने’ के बाद गणपत और उनके लोगों ने उस जगह पर चर्च बनाना शुरू कर दिया। पवार ने चर्च के निर्माण को रोकने की मांग करते हुए पुलिस को पूर्व सरपंच के खिलाफ कड़ा ऐक्शन लेने की मांग की थी। उसका आरोप था कि पूर्व सरपंच ने आदिवासी लोगों की धार्मिक भावनाओं को आहत किया है।

बता दें कि गांव की आबादी करीब 1 हजार लोगों की है, जिसमें 25 प्रतिशत लोग ईसाई और बाकी आदिवासी हैं। गांव में कोई चर्च नहीं है। ईसाई धर्म अपनाने वाले आदिवासी नजदीक के गांवों में प्रार्थना करने के लिए जाते हैं। डांग जिले में 1998-99 में हुए ईसाई विरोधी दंगों में सुबीर तालुका सबसे बुरी तरह प्रभावित होने वाले तालुकों में शामिल था।

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