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मध्यप्रदेश के खरगौन में उड़ीसा के दाना मांझी की तरह ही एक और मामला सामने आया हैं. सेगांव गाँव में एक बच्चे की मौत के बाद उसे बुजुर्ग दादा को पोते का शव कंधे पर लेकर करीब डेढ़ किमी तक पैदल चलना पड़ा.

सोमवार को ग्राम छिपीपुरा का महेश पिता सुखलाल की करंट लगने से मौत हो गई थी. एंबुलेंस नहीं मिलने के कारण महेश के दादा गुलसिंह को पुलिस ने शव का पोस्टमर्टम करा कर सौंप दिया. पोस्टमार्टम के बाद शव ले जाने के लिए परिजन ने अस्पताल में भटकते रहें  लेकिन किसी ने भी उनकी मदद नै की.

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गुलसिंह ने बताया कि अस्पताल प्रबंधन ने वाहन नहीं होने का हवाला देकर लौटा दिया. इसके बाद वे दोनों शव को उठाकर घर के लिए निकल पड़े.

करीब डेढ़ किमी पैदल चलने के बाद पुलिस ने जनसहयोग से एक निजी वाहन कर शव को घर भेजा. इस मामले में अस्पताल प्रबंधन का कहना हैं कि उनके पास कोई शव वाहन उपलब्ध नहीं है.

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