तीन दिन से चल रहे मुग़ल बादशाह शाहजहाँ का उर्स आज विधिवत तरीके से खत्म हो गया हैं. शाहजहां के 362वें उर्स के तीसरे और अंतिम दिन ताजमहल पर खुद्दाम-ए-रौजा कमेटी की ओर से एक हजार मीटर लम्बी चादर भी चढ़ाई गई.

खुद्दाम-ए-रौजा कमेटी के अध्यक्ष ताहिरउद्दीन ताहिर के नेतृत्व में मंगलवार को तीन बजे चादर चढ़ाने का सिलसिला प्रारम्भ हुआ. समूची चादर एक बड़ी घिरी में लिपटी हुई थी। लगभग तीन बजे उक्त र्रिी में लिपटी चादर को खोला गया और उसका सिरा कमेटी के अध्यक्ष ताहिरउद्दीन ताहिर अपने अन्य सहयोगियों के साथ लेकर ताजमहल की ओर चल दिए.

इसी के साथ ही जैसे जैसे चादर खुलती गई वैसे-वैसे उसे उठाने के लिए लोग उसमें अपना हाथ लगाते गए. इस दौरान चादर गुजरने के समय निकलने वाले पर्यटकों ने चादर को हाथ लगाकर अपनी हाजिरी दर्शायी। कुछ देर बाद ही चादर का अंतिम सिरा ताजमहल में तहखाने में बनी कब्रों तक पहुंच गया. इसी के साथ शाहजहां की कब्र पर पूरी चादर चढ़ा दी गई.

भारतीय पुरातत्व विभाग मुगल बादशाह शाहजहाँ के सालाना उर्स का नोटिफिकेशन जारी करता है. तीन दिन तक चलने वाले इस आयोजन में पहले दो दिन आधे दिन फ्री एंट्री होती है और तीसरे दिन पूरे दिन फ्री एंट्री. विभाग के अधिकारियों के मुताबिक 1653 से यह परंपरा चली आ रही हैं. हर साल इस्लामिक कैलेन्डर के रजब के महीने की 25-26-27 तारीख को उर्स मनाया जाता हैं. इस बार ये अप्रैल 23-25 तक मनाया गया.

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