गोरखपुर में 2007 में हुए साम्प्रदायिक दंगे के मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को कुछ राहत मिल गई है. इस मामले में अब 23 अक्टूबर को सुनवाई होगी.

23 अक्टूबर के दिन इलाहाबाद हाई कोर्ट फैसला करेगी कि इस मामले में सीएम योगी के खिलाफ मुकदमा चलाया जाए या नहीं. दरअसल आज  राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता के हाजिर नहीं होने से ये सुनवाई नहीं हो पाई. ऐसे में अब राज्य सरकार की ओर से दाखिल अर्जी पर कोर्ट ने कहा कि 23 अक्टूबर को केस की सुनवाई किसी हाल में स्थगित नहीं होगी.

ध्यान रहे गोरखपुर में 2007 में 26 व 27 जनवरी की रात में मोहर्रम जुलुस के दौरान साम्प्रदायिक तनाव हो गया था. याचिकाकर्ता के अनुसार, महाराणा प्रताप चौराहा पर बीजेपी के बड़े नेताओं की अगुवाई में सभा हुई. जिसमे भड़काऊ भाषण दिए गए. भाषण देने वालों में तत्कालीन सांसद योगी आदित्यनाथ भी थे. उनके भाषण के बाद ही दंगा भड़क गया. इस दंगे में राशिद नाम के एक युवक की भी जान चली गई थी.

राशिद की मौत के बाद वादी बने परवेज परवाज ने केस दर्ज कराया लेकिन पुलिस द्वारा मामला दर्ज न करने के बाद उन्होंने अदालत का रुख किया. अदालत के आदेश पर  योगी आदित्यनाथ के खिलाफ भड़काऊ भाषण देने व उन्माद फैलाने की धाराओं सहित 302, 153ए, 153बी, 295, 295बी, 147, 143, 427, 452 के तहत कैण्ट थाना में मुकदमा दर्ज किया गया.

अब याचिकाकर्ता मानवाधिकार कार्यकर्ता परवेज परवाज और असद हयात की ओर से दाखिल याचिका में दंगे की जांच सीबीआई या फिर किसी अन्य स्वतंत्र एजेंसी से कराए जाने की भी मांग की गई है.

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