राजस्थान सरकार ने सोमवार को इंदिरा गांधी द्वारा लगाई गई इमर्जेंसी के दौरान MISA कानून के तहत हिरासत में लिए गए लोगों को दी जाने वाले पेंशन और अन्य सुविधाओं को बंद करने का फैसला लिया है।

बताया जा रहा है कि गहलोत सरकार का ये फैसला उन नेताओं या उनकी विधवाओं पर लागू होगा जो 26 जून 1975 से लेकर 1977 के दौरान जेलों में बंद रहे थे। दरअसल, सरकार मानती है कि ये लोग स्वतंत्रता सेनानी नहीं हैं। सीएम अशोक गहलोत की अगुआई में हुई प्रदेश कैबिनेट की बैठक में यह फैसला लिया गया।

गहलोत सरकार के इस फैसले का प्रभाव सबसे ज्यादा बीजेपी और आऱएसएस के नेताओं पर पड़ेगा क्योंकि जेलों में बंद रहने वालों की संख्या उन्ही की ज्यादा थी। अब इन लोगों को सरकार 20 हजार पेंशन और  मेडिकल भत्ता अलग से देती थी लेकिन इस फैसले के बाज न तो अब उन्हें पेंशन दी जाएगी और न ही मेडिकल भत्ता मिलेगा।

मंत्रिमण्डल ने इसके लिए राजस्थान लोकतंत्र सेनानी सम्मान निधि नियम, 2008 को निरस्त कर दिया है। इससे सरकारी खजाने पर पड़ने वाला करीब 40 करोड़ रुपये सालाना वित्तीय भार कम होगा।

मीसा बंदियों के भत्ते बंद करने पर सूबे के मंत्री शांति धारीवाल ने कहा कि सरकार ऐसे लोगों को स्वतंत्रता सेनानी नहीं मानती। बता दें कि मीसा बंदियों को 20 हजार रुपये महीने की पेंशन मिलती है। जुलाई 2018 में तत्कालीन बीजेपी सरकार ने पेंशन की रकम को 12 हजार रुपये से बढ़ाकर 20 हजार रुपये करने का फैसला लिया था।

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