Sunday, October 24, 2021

 

 

 

गहलोत सरकार ने दिया छात्रों को धोखा, कॉलेजों में परीक्षा की जा रही आयोजित

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कोटा: राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार पर न केवल छात्रों को धोखा देने बल्कि उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लग रहा है। दरअसल, कोरोना महामारी के बीच रद्द की कॉलेजों की परीक्षाओं को फिर से आयोजित कर छात्रों को परीक्षा देने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, कोटा विश्वविद्यालय ने एक बार फिर से विभिन्न परीक्षाओं के टाइम टेबल जारी कर दिये है। जिसमे बीए-एलएलबी सेमेस्टर I और III, एलएलबी सेमेस्टर I, III, V, की परीक्षा 7 अक्टूबर से आयोजित कराई जा रही है। हालांकि इन परीक्षाओं को राज्य सरकार ने पहले ही रद्द कर छात्रों को अगले सत्र में प्रमोट करने हेतु निर्देशित किया था।जिसके बाद कोटा विश्वविद्यालय ने भी इन परीक्षाओं को रद्द कर जारी टाइम टेबल को वापस ले लिया था।

उल्लेखनीय है कि कोरोना वायरस से बिगड़े माहौल के देखते हुए बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने भी देश के विभिन्न कॉलेजों में पढ़ाई कर रहे सभी लॉ स्टूडेंट्स बिना परीक्षा प्रमोट कर देने को कहा था। हालांकि इसमें फाइनल ईयर के स्टूडेंट्स शामिल नहीं हैं। फाइनल ईयर के स्टूडेंट्स को परीक्षा देनी होगी।

बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने कहा था, फाइनल ईयर के अलावा अन्य सभी स्टूडेंट्स को उनके पिछले साल के अंकों और मौजूदा वर्ष में हुए इंटर्नल एग्जाम्स में मिले अंकों के आधार पर प्रमोट किया जाएगा। इस संबंध में बीसीआई ने नए दिशानिर्देश भी जारी कर दिए हैं।

कोटा विश्वविद्यालय की और से टाइम टेबल जारी करने को लेकर छात्रों में काफी आक्रोश है। छात्रों का कहना है कि प्रदेश सरकार और विश्वविद्यालय ने छात्रों के जीवन को एक खेल बना दिया है। अब मर्जी चाहे परीक्षा के टाइम टेबल जारी कर दिये जाते है। जब मर्जी हो परीक्षा रद्द कर दी जाती है। न तो सरकार को और नहीं विश्वविद्यालय छात्रों के जीवन की परवाह है।

छात्रों ने बताया कि बीते 7 महीनों से छात्र तनाव में अपना जीवन व्यतीत कर रहे है। छात्र बीते सेमेस्टर का समुचित अध्ययन नहीं कर पाये है। वहीं परीक्षाओं के रद्द होने के बाद जब छात्र अगले सेमेस्टर की तैयारी कर रहे है। तो फिर से से पिछले सेमेस्टर की परीक्षा आयोजित करना कहां तक जायज है। उन्होने कहा कि अगर परीक्षा करानी ही थी तो फिर रद्द ही क्यों की गई थी और छात्रों से अगले सत्र में प्रमोट करने का झूठा वादा ही क्यों किया गया था।

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