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श्रीनगर: कश्मीरी मुसलमानों ने नफरत की राजनीति और सांप्रदायिक ताकतों को करारा जवाब देते हुए एक बार फिर से धार्मिक सद्भाव, भाईचारगी, इंसानियत और कश्मीरियत की बेहतरीन मिसाल पेश की है.

दरअसल, दक्षिण कश्मीर के त्राल, पुलवामा में शुक्रवार को एक कश्मीरी पंडित महिला का निधन हो गया था. इस दौरान मुस्लिम भाइयों ने न सिर्फ दिवंगत की अर्थी को कंधा दिया बल्कि उसके अंतिम संस्कार का भी पूरा बंदोबस्त किया.

त्राल के पास स्थित नूरपोरा में रहने वाली कश्मीरी पंडित महिला कमलावती (80) का सुबह लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया. निधन की खबर मिलते ही सभी मुस्लिम पड़ोसी उसके घर पहुंच गए. उन्होंने कमलावती के दाह संस्कार की तैयारियों में परिजनों का पूरा सहयोग किया.

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स्थानीय युवक वह हमारी पड़ोसन ही नहीं थीं, वह हमारी मां जैसी थीं. वह कश्मीरी पंडित होगी, लेकिन वह कश्मीरी ही थी. हम यहां एक ही परिवार की तरह रहते आए हैं. इस्लाम भी तो दूसरे मजहब के लोगों के साथ मोहब्बत से रहना सिखाता है। हमारी कश्मीर की तहजीब हमें सभी के साथ मिलकर रहना सिखाती है.

वहीँ मृतका के एक रिश्तेदार ने बताया कि हमें यहां कभी महसूस नहीं हुआ कि हम किसी आतंकवाद प्रभावित इलाके में रहते हैं, क्योंकि हमारे मुस्लिम पड़ोसियों ने हमें कभी अल्पसंख्यक होने का अहसास नहीं होने दिया. यही तो कश्मीरियत है.

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