बिहार के सीमांचल में स्थित 12 से ज्यादा जिलों में बाढ़ ने तांडव मचाया हुआ है. अब तक 106 लोगों की जान जा चुकी है. हालात जल्द नहीं सुधरे तो ये आंकड़ा और तेजी से बढ़ सकता है.

राज्य के पूर्णिया, किशनगंज, अररिया, कटिहार, मधेपुरा, सुपौल, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, दरभंगा, मधुबनी, सीतामढ़ी, शिवहर और मुजफ्फरपुर जिले के 98 प्रखंड की 1,070 ग्राम पंचायतों की 73 लाख से ज्यादा की आबादी बाढ़ से प्रभावित है. जबकि अब तक लगभग तीन लाख लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया गया है.

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राज्य के अलावा नेपाल से आने वाली नदियां भी आफत बनी हुई है. कोसी, महानंदा, बागमती और ललबकिया ने अपने सर्वोच्च जलस्तर को पीछे छोड़ कर नया रिकार्ड कायम करने पर तुली हुई है. महानंदा नदी ने 49 साल पुराना रिकार्ड तोड़ दिया है. वहीँ कटिहार भी अपना 30 साल पुराना रिकार्ड तोड़ चुकी है. इसके अलावा कोसी, बागमती भी रिकॉर्ड बनाने में पीछे नहीं है.

बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोगों की मदद के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ ) की 22 और एसडीआरएफ की 15 टीमों के अतिरिक्त सेना के 300 जवान लगाए गए हैं. पीड़ितों के लिये बिहार में फिलहाल 504 राहत शिविरों चलाये जा रहे हैं. बाढ़ से प्रभावित जिलों पर नजर डाले सबसे ज्यादा अररिया जिला प्रभावित है.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी के साथ बाढ़ प्रभावित बेतिया एवं वाल्मीकिनगर का हवाई सर्वेक्षण करने वाले थे, लेकिन खराब मौसम के कारण वे उड़ान नहीं भर सके.

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