Friday, June 18, 2021

 

 

 

यूपी के बरेली में दर्ज हुआ नए धर्म परिवर्तन कानून के तहत पहला मामला

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गैर कानूनी धर्म परिवर्तन अध्यादेश को राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस ने बरेली में पहला मामला दर्ज किया है। बरेली के देवरनिया इलाके में एक छात्रा के पिता ने धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने का आरोप लगाते हुए गाँव के ही किशोर के खिलाफ पुलिस में एफ़आईआर दर्ज कराई है।

देवरनिया के गांव शरीफनगर निवासी व्यक्ति ने बताया कि गांव में ही रहने वाले रफीक अहमद का बेटा उवैस अहमद ने पढ़ाई के समय से उनकी लड़की से जान पहचान बना ली थी। पीड़ित ने बताया कि वह अब उनकी बेटी को बहला-फुसलाकर धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बना रहा है। जबरन धर्म परिवर्तन कराना चाहता है।

पीड़ित के मुताबिक उनके व परिवार द्वारा कई बार आरोपी से मना किया जा चुका है। फिर भी वह मानने को राजी नहीं है। लगातार दबाव बना रहा है। पुलिस ने उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम 3/5 की धारा में मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस ने बताया कि मामले में कार्रवाई की जा रही है। आरोपी मौके से फरार है, जिसकी तलाश की जा रही है।

बता दें कि यूपी की राज्यपाल आनंदी बेन ने शनिवार को विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन परिवर्तन प्रतिषेध अध्यादेश 2020 को मंजूरी दे दी है। आज से महज शादी के लिए अगर लड़की का धर्म बदला गया तो न केवल ऐसी शादी अमान्य घोषित कर दी जाएगी, बल्कि धर्म परिवर्तन कराने वालों को दस साल तक जेल की सजा भी भुगतनी पड़ सकती है।

इस नए अध्यादेश के मुताबिक उत्तर प्रदेश में बलपूर्वक, झूठ बोलकर, लालच देकर या अन्य किसी कपटपूर्ण तरीके से अथवा विवाह के लिए धर्म परिवर्तन गैर जमानती अपराध होगा।  इस गैर जमानती अपराध के मामले में प्रथम श्रेणी मजिस्ट्रेट के न्यायालय में मुकदमा चलेगा। दोष सिद्ध हुआ तो दोषी को कम से कम 1 वर्ष और अधिकतम 5 वर्ष की सजा भुगतनी होगी, साथ ही न्यूनतम 15,000 रुपए का जुर्माना भी भरना होगा।

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