यूपी के गाजियाबाद जिले में वाल्मीकि समुदाय के करीब 236 लोगों ने हिंदू धर्म छोड़कर बौद्ध धर्म अपनाने के बाद अब पुलिस ने गुरुवार को अज्ञात लोगों के खिलाफ धर्म परिवर्तन की अफवाह फैलाने का केस दर्ज किया है।

गुरुवार को साहिबाबाद पुलिस स्टेशन पर एक 22 साल के सामाजिक कार्यकर्ता- मोंटू चंदेल की शिकायत पर पुलिस ने आईपीसी की धारा 153-ए (दो संप्रदायों में दुश्मनी भड़काने) और धारा 505 (अफवाह के प्रसार) के तहत केस दर्ज किया है।

एफआईआर में कहा गया है कि कुछ अज्ञात लोगों और संगठनों ने 230 लोगों के धर्म परिवर्तन की झूठी अफवाहें फैलाई हैं। इस मामले में जो सर्टिफिकेट जारी किए गए हैं, उनमें न तो कोई नाम है और न ही पता। इन सर्टिफिकेट्स को जारी करने की तारीख तक नहीं दी गई है। न ही इनमें कोई रजिस्ट्रेशन नंबर है या किसी जारी करने वाले का नाम है।

बता दें कि गाजियाबाद के करहैड़ा गांव में 14 अक्टूबर को डॉ. बीआर अंबेडकर के पड़पोते राजरत्न अंबेडकर ने 50 परिवारों को बौद्ध धर्म की दीक्षा दिलाई। इस दौरान बौद्ध धर्म में शामिल होने वाले इन सभी लोगों ने गौतम बुद्ध की 22 प्रतिज्ञाएं भी पढ़ीं। धर्म परिवर्तन करने वाले सभी लोगों को भारतीय बौद्ध महासभा की तरफ से एक प्रमाण पत्र भी जारी किया गया।

पवन वाल्मीकि नामक शख्स ने कहा, ‘हाथरस की घटना के बाद योगी सरकार में हमारा भरोसा नहीं रहा है। हिंदू समाज के लोग हमें अपना नहीं मानते और मुस्लिम समाज हमें कभी स्वीकार नहीं करेगा। हाथरस में जो कुछ हुआ, उसके बाद हमें एहसास हो गया कि सरकार कभी ना हमें स्वीकार करेगी और ना हमारी मदद करेगी। तो हमारे सामने क्या विकल्प बचता है?’

वहीं, रज्जो वाल्मीकि नाम की 65 वर्षीय महिला ने बताया, ‘दिल्ली की निर्भया को सबसे अच्छे अस्पताल में इलाज मिला और मीडिया में कभी उसकी जाति सामने नहीं आई। हाथरस में हमारी बेटी के साथ बुरा बर्ताव किया गया, यहां तक कि डॉक्टर और पुलिस ने भी उसके शव के साथ कोई हमदर्दी नहीं दिखाई। मीडिया क्यों उनके परिवार को परेशान कर रहा है? हमें ये एहसास दिला दिया गया है कि हम ‘कोई दूसरे’ हैं, निचली जाति से हैं।’

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