2014 से ही भारतीय जनता पार्टी पूरी तरह से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर टिकी हुई थी. केवल मोदी ही एक ऐसा चेहरा थे जो बीजेपी की और से कश्मीर से कन्याकुमारी तक छाया हुआ था. लोकसभा हो या विधानसभा, निगम के चुनाव हो या छात्र संघ के, यहाँ तक कि ग्राम पंचायतों के चुनावों में भी सिर्फ पीएम मोदी ही नजर आ रहे थे.

लेकिन नोटबंदी के बाद हालात ऐसे हो गए कि बीजेपी अब पीएम मोदी की तस्वीरों को प्रचार में शामिल करने से कतरा रही है. जाब विधानसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशीयों की और से चुनावी होडिंग्स में पीएम मोदी की तस्वीर को लगाया नहीं गया हैं.

नोटबंदी के बाद से ही देश के लोगों में काफी गुस्सा हैं. जिसका भाजपा प्रत्याशियों को सामना करना पड़ रहा हैं. याद रहें कि अमृतसर नार्थ सीट से भाजपा प्रत्याशी अनिल जोशी ने भरी जनसभा में बोला कि, हमे इस नोटबंदी की सजा मत देना क्योंकि यह प्लान तो पीएम मोदी का था.

इसके बाद कल अमृतसर वेस्ट से भाजपा प्रत्याशी राकेश गिल ने अपने चुनावी पोस्टर से पीएम मोदी की तस्वीर ही गायब कर दी. वहीँ पार्टी के ज्यादातर नेताओं की तस्वीर शामिल हैं. अब नोटबंदी केबाद उपजे हालात के लिए भाजपा प्रत्याशी सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं.


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