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फतवों को लेकर विवादों मे रहने वाला सहारनपुर स्थित दारुल उलूम देवबंद इस बार शियाओं पर दिए गए फतवे को लेकर विवादों मे है। देवबंद की और से फतवा जारी कर सुन्नी मुस्लिमों से शियाओं की इफ्तार और शादी की दावतों में जाने से परहेज करने को कहा गया है।

हालांकि फतवा सामने आने के बाद जमकर इसका विरोध किया गया। कुछ लोगों ने फतवे को फर्जी तक करार दे दिया। इस मामले मे अब फतवा लेने वाले सपा के सहारनपुर ही पूर्व जिला महासचिव सिकंदर अली सामने आए है। उन्होने फतवे को सही बताया है।

सिकंदर अली ने फतवे की कॉपी मीडिया को उपलब्ध कराते हुए कहा कि वो कोई मौलवी मुल्ला नहीं कि खुद फतवा तैयार कर लेंगे। यह फतवा उन्होंने दारुल उलूम से लिया है। उनका पक्ष जाने बिना ही कुछ लोग साजिश के तहत फतवे को फर्जी बताकर उन्हें झूठा साबित करने पर तुले हुए हैं।

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हालांकि इस मामले मे अब तक दारुल उलूम का कोई भी जिम्मेदार न तो सामने आया और न ही किसी तरह का स्पष्टीकरण दिया है। बता दें कि मोहल्ला बड़जिया उलहक निवासी सिकंदर अली ने दारुल उलूम में स्थित फतवा विभाग के मुफ्तियों से लिखित में सवाल किया था कि शिया हजरात रमजान-उल-मुबारक में रोजा इफ्तार की दावत करते हैं, क्या सुन्नी मुसलमान का इसमें शरीक होना जायज है? जबकि दूसरे सवाल में पूछा है कि शिया हजरात के यहां शादी वगैरह के मौके पर जाना और वहां खाना कैसा है?

इस सवाल के जवाब में दारुल उलूम के तीन मुफ्तियों ने किया है। जिसमे कहा गया कि दावत चाहे इफ्तार की हो या फिर शादी की शियाओं की दावत में सुन्नी मुसलमानों को खाने पीने से परहेज करना चाहिए।

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