कोलकाता की टीपू सुल्तान मस्जिद के शाही इमाम सैयद मोहम्मद नुरुर रहमान बरकती को पीएम मोदी के खिलाफ फतवा जारी करना महंगा पड़ गया हैं. अब उनके खिलाफ मुंबई के मदरसा-दारुल-उलूम अली हसन सुन्नत के मुफ्ती मंजर हसन खान अशरफी मिस्बही ने फतवा जारी किया हैं.

इस फतवे में कहा गया कि “ऐसे बयानों को फतवा नहीं कहा जा सकता है क्योंकि इससे समाज की शांति को खतरा पैदा होता.” यह उनकी व्यक्तिगत और राजनीतिक राय है और शरीयत इसका समर्थन नहीं करता है.” मिस्बही ने यह दावा भी किया कि बरकती मुफ्ती नहीं हैं और उन्होंने अपनी राजनीतिक राय को फतवा बताकर उसकी पवित्रता को खत्म करने की कोशिश की है.

दरअसल, बरकती ने फतवा जारी कर पीएम के बाल व दाढ़ी का मुंडन करने वाले को 25 लाख रुपये का इनाम देने की घोषणा की थी. ‘नोटबंदी के कारण हर रोज लोगों को प्रताड़ित होना पड़ रहा है और समस्याएं झेलनी पड़ रही हैं. मोदी नोटबंदी के नाम पर समाज और देश की भोली-भाली जनता को बेवकूफ बना रहे हैं. अब कोई उन्हें प्रधानमंत्री बनाना नहीं चाहता. उन्होंने कहा था, पीएम ने नोटबंदी की घोषणा कर पाप किया है, यह फतवा उसी का दंड है.

शाही इमाम को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का समर्थक माना जाता हैं. बरकती ने कुछ दिन पूर्व ममता पर टिप्पणी को लेकर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष के खिलाफ फतवा जारी कर उन्हें पत्थर मारकर राय से निकालने की बात कही थी.


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