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राजस्थान में किसान कर्ज के बौझ के कारण आत्महत्या कर रहे है। लेकिन सरकार की और से मदद के बजाय उनकी ज़मीनों की कुर्की के आदेश निकाले जा रहे है। नतीजा किसान गले में फंदा डाल झूल रहे है।

ताजा मामला नागौर जिले के चारणवास गांव का है। यहां के 30 साल के शारीरिक रूप से अक्षम किसान मंगल चंद ने 4 अगस्त की रात फंदे से लटककर खुद को खत्म कर लिया।दरअसल, मंगल बैंक का कर्ज समय पर नहीं चुकाने से तनाव में थे। उन्होंने जमीन की नीलामी का आदेश जारी होने की वजह से खुदकुशी कर ली।

किसान मंगल की हत्या के बाद से इलाके में तनाव है। प्रशासन का वार्ताओं का दौर जारी है। जिसके बाद कर्जमाफी, जमीन नीलामी का आदेश निरस्त करने और बैंककर्मियों के खिलाफ जांच करने के आदेश दिये गए है। साथ ही परिवार को मुआवजा, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान और मंगल की भाभी को आंगनबाड़ी में नौकरी देने का वादा किया।

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इसी बीच राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सचिन पायलट ने कहा कि कर्ज में डूबे होने के कारण निराश होकर कल फिर एक धरती पुत्र नागौर के चारणवास गॉंव निवासी मंगलचंद ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री दावे कर रही है कि उनकी सरकार 50 हजार रूपये तक का फसली ऋण माफ कर रही है जबकि सच्चाई यह है कि किसानों की आत्महत्या का सिलसिला अनवरत जारी है।

उन्होंने कहा कि एक तरफ मुख्यमंत्री चुनावी यात्रा निकाल रही हैं और दूसरी तरफ प्रदेश के गौरव को ठेस पहुॅंच रही है, क्योंकि भाजपा सरकार की घोषणा के विपरीत किसान कर्जे में डूबे होने के कारण मौत को गले लगा रहे हैं।

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