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देश भर में मोदी सरकार लड़कियों की शिक्षा के लिए बेटी बचाओ,बेटी पढ़ाओ अभियान चला रही है. लेकिन उतराखंड में इस अभियान का लाभ मुस्लिम लड़कियों को मिलता नहीं दिख रहा है.

दरअसल, केंद्र सरकार के जो ताज़ा आंकड़े सामने आये है उनमे पता चला कि राज्य में मुस्लिम लड़कियों का स्कूल ड्राप आउट लगभग 90 फ़ीसदी है. यानि केवल 10 फीसदी मुस्लिम लड़कियां ही शिक्षा हासिल कर रही है.

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आकड़ों के अनुसार, स्कूलों में पहली कक्षा में पढ़ने वाली मुस्लिम लड़कियों की तादाद 62,241 है लेकिन दसवीं तक आते-आते यह सिर्फ़ 12,062 रह जाती हैं. बारहवीं कक्षा तक तो यह संख्या चिंताजनक रूप से गिरकर सिर्फ 6,797 ही रह जाती है. ऐसे में स्पष्ट है कि स्कूल जाने वाली मुस्लिम लड़कियों में से केवल 10 फीसदी लड़कियां 12वी पास कर पा रही है.

ध्यान रहे उत्तराखंड में अल्पसंख्यक आबादी लगभग सत्रह फीसदी है. जिसमें से मुस्लिम आबादी तकरीबन चौदह फीसदी है. साथ ही ये भी बता दें कि उच्च शिक्षा के मामले में मुस्लिम लड़कियों के हालत और बदतर है. लेकिन सरकार की और से कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है.

इस गंभीर समस्या पर सूबे के अल्पसंख्यक आयोग ने भी रिपोर्ट तैयार कर सरकार को भेजी थी लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई. इस बार फिर गंभीरता से विचार करने के, नई योजनाएं बनाने के दावे तो हैं लेकिन इन पर अमल हो पाएगा इस पर विश्वास करने की कोई ठोस वजह नज़र नहीं आती.

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