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कर्नाटक में अलगे साल होने वाले विधानसभा चुनाव के भगवा संगठनों ने राज्य  की फिजाओं में साम्प्रदायिकता का जहर घोलना अभी शुरू कर दिया है. इसके लिए हाल ही में 18 वर्षीय पारेश कमलाकर मेस्ता नाम के एक किशोर की रहस्यमयी तरीके से हुई मौत को आधार बनाया गया है.

भगवा संगठनों ने पारेश को आरएसएस का वर्कर करार देते हुए फर्जी खबर फैलाई कि उसकी हत्या जिहादी तत्वों ने की है. ये खबर ने केवल सोशल मीडिया बल्कि फर्जी खबर देने वाली न्यूज वेबसाइट पोस्टकार्ड के जरिए भी फैलाई गई.  जिसमे कहा गया कि परेश मेस्ता पर धारदार हथियार से हमला किया गया. उसका सिर सहित उसके कई अंगों को काट दिया गया. साथ ही उसे एसिड डालकर जलाया भी गया. हालांकि ऐसा कुछ नहीं हुआ. इस बात का खुलासा पारेश की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में हुआ.

इस पुरे मामले को तिल का पहाड़ बनाने में बीजेपी सांसद शोभा करांडलजे खुद आगे रही. उन्होंने बिना किसी जांच के ट्वीट कर अफवाहों को फैलाया. जिसमे उन्होंने कहा अब उसका शव मिला है. उस पर धारदार हथियारों से हमला किया गया, उसके शरीर के कई पार्ट्स काट दिए गए और फिर एसिड या किसी केमिकल से उसका चेहरा जला दिया गया. मरने के बाद उसे झील में फेंक दिया गया.

हालांकि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद फर्जी खबरों का भंडाफोड़ हो गया. मेडिकल रिपोर्ट में कहा गया कि जो भी कहा जा रहा है, सब गलत है. रिपोर्ट के मुताबिक परेश के शव के साथ दरिंदगी नहीं हुई है. डॉक्टरों के मुताबिक युवक के शरीर पर किसी तरह के धारदार हथियार से हमला नहीं हुआ है.

ध्यान रहे भगवा संगठनों सिरसी सहित अन्य जिलों में जमकर बवाल मचाया. मस्जिदों में तोड़फोड़ सहित मुस्लिमों को जमकर निशाना बनाया गया.

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