Friday, September 24, 2021

 

 

 

‘दीन से दूरी बन रही मुस्लिमों में नशे की लत, इश्क ए रसूल सबसे बड़ा इलाज’

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दिलशाद नूर

मुंबई: इंटरनेशनल एंटी ड्रग्स दे के मौके पर शनिवार को सुन्नी बिलाल मस्जिद सोनपुर में एनसीबी के ज़ोनल डाइरेक्टर समीर वानखेडे ने दीन से दूरी को नशे की सबसे बड़ी लत करार देते हुए कहा कि उलेमा ए किराम युवाओं और किशोरों में नशे की लत को काबू करने में अहम भूमिका निभा सकते है।

उन्होने कहा कि इस्लाम में नशा हराम है। मस्जिदों और मदरसों के जरिये नशे के खिलाफ एक कामयाब जंग लड़ी जा सकती है। उन्होने कहा कि हमने अपनी जांच में पाया कि नशा करने वाले मुस्लिम नौजवानों से जब पूछा गया कि इस्लाम में कितने कलमे है तो वह ये भी नहीं बता सके। उन्हे फ़जर की नमाज की रकआत के बारे में भी जानकारी नहीं। किसी ने सात बताई तो किसी ने पांच। किसी ने कहा कि हम तो सिर्फ जुम्मे की नमाज पढ़ते है वह भी दो रकआत।

ज़ोनल डाइरेक्टर समीर वानखेडे ने इस दौरान 54 मस्जिदों के इमाम ओ खतीब और जिम्मेदारों सहित मुंबई के उलेमाओं और इस्लामिक संगठनो के प्रमुखों से नशे के खिलाफ अभियान चलाने पर जोर दिया। उन्होने कहा कि अगर युवाओं को नशाखोरी से बचाना है तो उलेमाओं को आगे आना होगा। युवाओं की काउंसलिग उलेमा ही बेहतर कर सकते है।

इस मौके पर हज़रत सय्यद मोईन मियां साहब ने कहा कि उलेमा सिर्फ मस्जिद के इमाम ही नहीं है। कौम के भी इमाम है। इस्लाम में समाज में फ़ेल रही बुराई को दूर करना भी आपकी ज़िम्मेदारी है। ऐसे में युवाओं को इश्क ए रसूल का जाम पिलाए। जिससे वे न केवल नशे से महफूज हो बल्कि हर सामाजिक बुराई से दूर रहकर कौम और मुल्क की खिदमत करें। उन्होने कहा कि रज़ा एकेडमी पिछले 10 सालों से नशे के खिलाफ लड़ रही है लेकिन कुछ असामाजिक तत्वों ने दरगाहों को इस गोरखधंधे का जरिया बना लिया है और गाँजा, अफीम, भांग को दरगाहों से जोड़ दिया। जिसका न तो इस्लाम से वास्ता है और नहीं सूफिवाद से। कुरान और हदीस में इस बात की कतई इजाजत नहीं है कि सूफिवाद की आढ़ में समाज को तबाह और बर्बाद कर दिया जाए।

वहीं अल्हाज मुहम्मद सईद नूरी साहब ने कहा कि युवाओं को नशे की लत से बचाने के लिए उलेमा ए अहले सुन्नत एनसीबी के साथ खड़े है। एनसीबी के गाइडेंस में युवाओं को नशे की लत से बचाने के लिए समय-समय पर अभियान चलाये जाएँगे। सेमिनार और वर्कशॉप के जरिये युवाओं की काउंसलिंग करेंगे। मस्जिदों और दीनी प्रोग्राम के मिंबर से भी युवाओं को जागरूक करेंगे।

इस अवसर पर मौलाना अब्दुल जब्बार महेरुल कादरी चिश्ती, मौलाना नूरुल ऐन सिद्दीकी, मौलाना महफूज-उर-रहमान अलीमी, मौलाना कारी अताउल्लाह कादरी, मौलाना खलील-उर-रहमान नूरी, मौलाना मकसूद अली नूरी, मौलाना सूफी मुहम्मद उमर, मौलाना ऐन-उद-दीन, कारी नियाज अहमद, कारी मुहम्मद नाजिम कादरी, मौलाना मुश्ताक अहमद तिघी, मौलाना महमूद आलम रशीदी, मौलाना वलीउल्लाह शरीफी, मौलाना अब्दुल हनान अशरफी, मो. लाना महमूद अली खान अशरफी, मौलाना अब्दुल रहीम अशरफी, मौलाना अब्बास रिजवी, मौलाना मुहम्मद इलियास खान,सैयद महफूज रजा नूरी, चंबोर घाटकोपर से मौलाना रज़ीउल्लाह शरीफी, मदनपुर से अब्दुल हक रिज़वी, राबोरी पुलिस स्टेशन से मौलाना अज़ीम-उद-दीन नूरी, मौलाना जुल्फिकार अली अशरफी, मुहम्मद रशीद अग्री पारा, कुर्ला मुंबई से मौलाना गुलाम अहमद रज़ा,  मौलाना शमीम अख्तर, अब्दुल कादिर रिज़वी, जाहिद हुसैन रिज़वी सहित लगभग 54 मस्जिदों के इमाम उपस्थित थे।

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