Thursday, September 23, 2021

 

 

 

मध्य प्रदेश में मुस्लिम अधिकारियों के साथ हो रहा दोयम दर्जे का सलूक

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मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक मुस्लिम अफसर के ट्वीटर के जरिए राज्य में मुसलमानों के साथ होने वाले दोयम दर्जे के व्यवहार के खिलाफ आवाज उठाने की कोशिश की है।

पीएचई विभाग में उपसचिव नियाज अहमद खान ने ट्विटर पर एक सीनियर अफसर द्वारा किए गए दुर्व्यवहार की घटना का ब्यौरा पेश किया। नियाज अहमद खान ने बताया कि उनके नाम के साथ खान लगे होने के कारण उन्हें अपनी सर्विस के दौरान बहुत कुछ भुगतना पड़ा है और खान सरनेम भूत की तरह उनका पीछा कर रहा है।

नियाज ने ट्विटर पर लिखा, “वे 17 साल से सरकारी नौकरी में हैं। इस दौरान वे 10 जिलों में तैनात रहे। उनके साथ प्रदेश में उसी तरह का व्यवहार किया जा रहा है, जैसा कि जर्मनी की सेना यहूदियों के साथ करती थी।”  उन्होंने लिखा कि वे अपने साथ हुए व्यवहार के कारण गहरे अवसाद में आ गए थे, लेकिन साहित्य ने उन्हें बचा लिया। वे पांच उपन्यास लिख चुके हैं। अब छठा उपन्यास लिखने की तैयारी में हैं। इसमें वे लिखेंगे कि प्रदेश में मुस्लिम अधिकारियों को कैसे द्वितीय श्रेणी का नागरिक माना जाता है। यह सब उनके अनुभव के आधार पर होगा।

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नियाज ने आरोप लगाते हुए कहा है कि मुख्यमंत्री सचिवालय से हटाए जाने के बाद आईएएस अधिकारी विवेक अग्रवाल फ्रस्टेशन में हैं। यह सारा फ्रस्टेशन अपने अधीनस्थों पर निकालते हैं। पिछले दिनों हुई एक विभागीय बैठक में कुछ जानकारियां नीचे से आनी थी, जो नहीं आईं। इसी बहाने से उन्होंने मुझे गेट आउट बोलकर बैठक से निकाल दिया। इस घटना से व्यथित होकर मैंने मुख्य सचिव को पत्र लिखकर कहा कि मैं इस अधिकारी के साथ काम नहीं करूंगा। 

आजतक ने नियाज अहमद खान से बात की तो उन्होंने बताया कि ‘मैने ट्विटर का सहारा लिया क्योंकि पानी सिर के ऊपर जा चुका था’। बातचीत के दौरान नियाज खान ने गम्भीर आरोप लगाते हुए कहा कि वो भोपाल में सालभर से हैं लेकिन उन्हें सरकारी घर तक नही दिया जबकि उनके साथ वाले लगभग सभी को मकान मिल चुका है।

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