महाराष्ट्र के पुणे में कोरोना महामारी से संक्रमित डॉक्टर की मौत हो गई। जिसके बाद उनका अंतिम संस्कार करने के लिए कोई तैयार नहीं था। ऐसे में तबलीगी जमाती लोगों ने आगे आकर शव का अंतिम संस्कार करा।

जानकारी के अनुसार, डॉ. रमाकांत जोशी के परिवार में सिर्फ एक लड़का है, लेकिन वह भी अमेरिका में रहता है और पत्नी की उम्र 74 वर्ष है और डॉ. चाहते थे कि 4 लोगों के कंधों पर उनकी शव यात्रा जाये, लेकिन कोरोना के वजह से कोई भी परिजन उनके पास आने के लिए तैयार नहीं था।

Short Post/2020-1408जलनखोर पोस्ट से दूर रहेंपुणे में आज MBBS डॉ. रमाकांत जोशी जी की कोरोना से मृत्यु हो गई है। …

Mohd Zahid ಅವರಿಂದ ಈ ದಿನದಂದು ಪೋಸ್ಟ್ ಮಾಡಲಾಗಿದೆ ಗುರುವಾರ, ಆಗಸ್ಟ್ 27, 2020

ऐसे में जब यह घटना तबलीग़ जमात से जुड़े हुए मुस्लिम युवकों के सामने आई तो उन्होंने न केवल सारी व्यवस्था की बल्कि शव को अपने कंधों पर रखकर श्मशान भूमि ले गए और अंतिम संस्कार भी किया।

इस घटना को लेकर लेखक राजेन्द्र पवार ने कहा कि ‘मुस्लिम समाज को बुरा समझा जाता है लेकिन आप एक बार मुसलमानों के प्रति स्नेह दिखा के देखो वे आपके लिए अपना जीवन दे देंगे। मुस्लिम समुदाय को बुरा माना जाता है, लेकिन जो कोरोना अवधि के दौरान सबसे अधिक मदद के लिए दौड़ा वह मुस्लिम समुदाय है।’